
नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी (Investigative Agency) ने विशेष अदालत (Special Court) में दावा किया है कि पेपर लीक की कड़ी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के उस पैनल तक पहुंच रही है, जो परीक्षा के प्रश्न तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ा था।
CBI के मुताबिक, लातूर के एक कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने NTA के पेपर-सेटर पैनल में शामिल पी वी कुलकर्णी से केमिस्ट्री के प्रश्न हासिल करने के लिए 5 लाख रुपये दिए थे। इस खुलासे के बाद परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
आरोपी के मोबाइल से मिले 36 फोटो, 132 लिखे हुए सवाल
CBI ने मोटेगांवकर की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत में डिजिटल सबूत पेश किए। जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच में गैलरी से केमिस्ट्री के हाथ से लिखे प्रश्नों की 36 तस्वीरें मिलीं।
इन तस्वीरों में कुल 132 सवाल लिखे हुए थे। जब इन प्रश्नों का मिलान NTA के मास्टर क्वेश्चन बैंक से किया गया, तो इनमें से 111 सवाल NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र से हूबहू मैच पाए गए। जांच एजेंसी के अनुसार, मोबाइल के मेटाडेटा विश्लेषण से पता चला कि ये तस्वीरें 3 मई को आयोजित परीक्षा से करीब 10 दिन पहले खींची गई थीं। CBI का दावा है कि ये नोट्स कथित तौर पर मोटेगांवकर की ही हैंडराइटिंग में लिखे गए थे।
5 लाख रुपये की रकम बरामद
CBI ने अदालत को बताया कि इस कथित पेपर लीक की कड़ी मोटेगांवकर के बेटे के जरिए जुड़ी, जो आरोपी पेपर-सेटर पी वी कुलकर्णी की केमिस्ट्री ट्यूटोरियल क्लास में पढ़ता था। जांच एजेंसी के अनुसार, इसी दौरान गोपनीय प्रश्न उपलब्ध कराए गए। CBI ने बताया कि प्रश्न हासिल करने के लिए हुई 5 लाख रुपये की डील की रकम को एक अन्य आरोपी मनोज भगवानराव शिरुरे की निशानदेही पर बरामद किया गया है। इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।
विवाद के बाद दोबारा हुई थी NEET-UG परीक्षा
NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद NTA ने 12 मई को 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को रद्द कर दिया था। बाद में मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई थी। CBI की जांच में सामने आए इन नए तथ्यों ने परीक्षा व्यवस्था और प्रश्नपत्र सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।
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