
नई दिल्ली । उत्तराखंड (Uttarakhand) के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham) में चढ़ावे की कथित चोरी (Theft) के मामले में जांच के दौरान महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। मामले की जांच कर रही पुलिस (Police) का दावा है कि गिरफ्तार आरोपी प्रमोद नौटियाल मंदिर में दान की गिनती के दौरान चार अलग-अलग अवसरों पर नकदी निकालते हुए सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में दिखाई दिया है। इन नए साक्ष्यों के सामने आने के बाद जांच का दायरा और व्यापक कर दिया गया है तथा मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अब तक 22 जून, 25 जून, 29 जून और 2 जुलाई को हुई दान गिनती की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग का परीक्षण किया गया है। जांच में सामने आया कि इन चारों दिनों की फुटेज में आरोपी की गतिविधियां संदिग्ध दिखाई दीं। पुलिस का कहना है कि रिकॉर्डिंग में आरोपी कई बार नकदी अलग करते हुए नजर आया है। इन फुटेज को मामले के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में जांच में शामिल किया गया है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक यात्रा सीजन शुरू होने के बाद मंदिर में अब तक कई बार चढ़ावे की गिनती की जा चुकी है। हालांकि तकनीकी कारणों और सीमित स्टोरेज क्षमता के चलते पुराने सीसीटीवी फुटेज स्वतः हट चुके हैं। ऐसे में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस प्रकार की गतिविधियां पहले भी हुई थीं। उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर ही आगे की जांच को दिशा दी जा रही है।
गिरफ्तार आरोपी प्रमोद नौटियाल को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की थी, लेकिन उसे तत्काल स्वीकृति नहीं मिल सकी। अब जांच एजेंसी दोबारा रिमांड के लिए उच्च अदालत का रुख करने की तैयारी कर रही है ताकि आरोपी से विस्तृत पूछताछ कर कथित चोरी की रकम और अन्य सामग्री की बरामदगी की जा सके।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने चोरी के आरोपों को स्वीकार नहीं किया और कई सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दिए। अब तक जांच के दौरान कथित रूप से चोरी की गई नकदी अथवा अन्य मूल्यवान वस्तुएं बरामद नहीं हो सकी हैं। हालांकि एक शालिग्राम शिला बरामद होने की जानकारी सामने आई है, जिसकी भी जांच की जा रही है।
प्रमोद नौटियाल मंदिर समिति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहा था। वह वीआईपी व्यवस्थाओं के साथ-साथ मंदिर में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया की निगरानी से भी जुड़ा हुआ था। लंबे समय से समिति से जुड़े होने के कारण उसे व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी थी। इसी कारण जांच एजेंसियां उसकी भूमिका के साथ-साथ पूरी दान गिनती व्यवस्था की भी समीक्षा कर रही हैं।
इस मामले में एक अन्य व्यक्ति की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई गई है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उसकी गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। वहीं मंदिर समिति ने दान गिनती की प्रक्रिया में प्रशासनिक बदलाव करते हुए संबंधित जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास किया है। समिति का कहना है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस, मंदिर समिति की आंतरिक जांच और राज्य स्तर पर गठित समिति अपने-अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही हैं तथा अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय किया जाएगा।
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