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‘यौन शक्ति खत्म होने तक उम्रकैद’, कोर्ट ने बदली रेप के दोषी की सजा

July 17, 2026

डेस्क: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2021 में 7 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में एक अहम फैसला सुनाते हुए दोषी की मौत की सजा को 50 साल की कठोर कैद में बदल दिया है. अदालत ने कहा कि अपराध बेहद जघन्य है और दोषी शैतान से भी बदतर है, लेकिन मामले की जांच और सबूतों में गंभीर खामियों के कारण मृत्युदंड को बरकरार रखना उचित नहीं होगा. आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है.

जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस रमेश चंद्र डिमरी की खंडपीठ ने अपने 54 पन्नों के फैसले में कहा कि यह उन मामलों में से है, जहां रेयरेस्ट ऑफ रेयर और रेयर के बीच की सीमा बहुक कम है. कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि दोषी भविष्य में किसी अन्य बच्ची के लिए खतरा न बने. इसलिए उसे कम से कम 50 साल की वास्तविक सजा पूरी किए बिना रिहा नहीं किया जाएगा.


  • मामला 24 मई 2021 का है, जब 7 साल की बच्ची अचानक लापता हो गई थी. उसी रात पुलिस ने एफआईआर दर्ज की. अगले दिन बच्ची के पिता ने पड़ोसी आनंद सिंह पर संदेह जताते हुए शिकायत दी. बाद में आरोपी को गिरफ्तार किया गया और बाद में बच्ची का शव बरामद किया गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ रेप की भी पुष्टि हुई थी. पलवल की विशेष अदालत ने 28 जुलाई 2023 में दोषी को मौत की सजा सुनाई थी. साथ ही पीड़ित परिवार को 30 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया था.

    हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस ने दावा किया था कि आरोपी की निशानदेही पर बच्ची का शव बरामद हुआ, लेकिन रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि पुलिस को आरोपी की गिरफ्तारी से पहले ही शव के स्थान की जानकारी मिल चुकी थी. कोर्ट ने जांच को लापरवाहीपूर्ण बताया और कहा कि सबूतों की गुणवत्ता और जांच की प्रक्रिया में गंभीर कमियां थीं. हालांकि अदालत ने यह भी माना कि उस समय कोविड-19 प्रतिबंधों के कारण जांच एजेंसियों को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा था.

    फैसले में अदालत ने पीड़िता को लाडली कहकर संबोधित किया और कहा कि वह अपने सातवें जन्मदिन से केवल 17 दिन दूर थी. कोर्ट ने भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्ची के माता-पिता द्वारा उसकी सुरक्षा के लिए गले और कमर में बांधे गए काले धागे भी उसे नहीं बचा सके, क्योंकि अपराधी शैतान से भी बदतर था.

    हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में दोषी को ऐसी उम्रकैद की सजा सुनाई है, जिसमें वह 50 वर्ष की वास्तविक कैद पूरी किए बिना रिहा नहीं हो सकेगा. हत्या के अपराध में उस पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. वहीं, पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत दोषी को 23 वर्ष की कैद और 23 लाख रुपये के अतिरिक्त जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है. अदालत ने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि पीड़िता के परिवार को दी जाए.

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