
गोंदिया शहर। महाराष्ट्र के गोंदिया शहर में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब मासूम बच्चे अपने घरों के सामने भी सुरक्षित नहीं हैं। गोंदिया के प्रभाग क्रमांक 4 बाईपास (रिंग रोड) स्थित मजार के पीछे एक बेहद रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। 15 जुलाई की सुबह करीब 9 बजे, एक 5 साल की मासूम बच्ची अपने घर के सामने रोजाना की तरह स्कूल वैन का इंतजार कर रही थी। तभी अचानक आवारा कुत्तों के एक खूंखार झुंड ने उस पर धावा बोल दिया। यह पूरा वाकया वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गया। सीसीटीवी फुटेज सामने आने पर अब शहर में दहशत का माहौल है।
अचानक हुए इस जानलेवा हमले में मासूम बालिका सड़क पर गिर गई और कुत्तों का झुंड उस पर टूट पड़ा। बच्ची की दर्दनाक चीखें और रोने की आवाज सुनकर आसपास के पड़ोसियों के होश उड़ गए। तभी पड़ोस की एक महिला फरिश्ता बनकर दौड़ी-दौड़ी वहां पहुंची उसने कुत्तों के झुंड को वहां से भगाया, जिससे बच्ची की जान बाल-बाल बच गई।
इस खूनी हमले में बच्ची घायल हो गई है। उसके शरीर पर कुत्तों के पंजों के खरोच और दांतों के हल्के निशान उभरे हैं। वारदात के बाद सहमा हुआ सुरेंद्र हरिनखेड़े परिवार तुरंत अपनी बच्ची को लेकर अस्पताल भागा, जहां उसे रेबीज का इंजेक्शन लगाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, शारीरिक चोटों से ज्यादा बच्ची गहरे मानसिक सदमे (डर) में है, जिसके कारण उसकी हालत बिगड़ गई थी। फिलहाल एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।
इस गंभीर घटना के बाद इलाके के नागरिकों में भारी आक्रोश है। स्थानीय पार्षद राज शुक्ला ने तुरंत एक्शन में आते हुए गोंदिया नगर परिषद के मुख्य अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी की जाए और तुरंत मुहिम चलाकर उनकी धरपकड़ शुरू की जाए, ताकि कोई और बच्चा इसका शिकार न बने।
गोंदिया शहर में आवारा कुत्तों की तादाद अब बेकाबू हो चुकी है। हालात ये हैं कि शहर के हर हिस्से में वाहन चालकों, पैदल चलने वालों, घरों के सामने खेल रहे बच्चों और बुजुर्ग नागरिकों पर हमले आम हो गए हैं। मॉर्निंग और इवनिंग वॉक पर निकलने वाले बुजुर्ग अब लाठी लेकर चलने को मजबूर हैं। देर रात ड्यूटी कर घर लौटने वाले नागरिकों के लिए ये आवारा कुत्ते ‘यमदूत’ साबित हो रहे हैं वहीं घरों के बाहर खेलने वाले बच्चों के माता-पिता हर वक्त खौफ के साए में जी रहे हैं। गोंदिया की जनता अब प्रशासन से सीधा सवाल पूछ रही है कि आखिर उन्हें इस ‘डॉग टेरर’ से मुक्ति कब मिलेगी?
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