नई दिल्ली। ईरान के रणनीतिक महत्व वाले चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबरों के बीच भारत सरकार (Government of India) ने राहत भरी जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत के संचालन वाले ‘शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल’ को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है। साथ ही सरकार ने कहा कि अमेरिका की ओर से चाबहार को मिली विशेष प्रतिबंध छूट समाप्त होने के बाद भी इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत जारी है।
विदेश मंत्रालय ने दी स्थिति की जानकारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा कि अमेरिकी हमलों से जुड़े घटनाक्रम पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि चाबहार बंदरगाह के संबंध में अमेरिका द्वारा दी गई विशेष प्रतिबंध छूट अप्रैल में समाप्त हो चुकी है और इसके बाद भारत इस विषय पर संबंधित देशों के साथ लगातार संवाद कर रहा है।
हमले को लेकर पूछे गए सवाल पर जायसवाल ने कहा कि सरकार ने इस संबंध में आई रिपोर्टों का संज्ञान लिया है, लेकिन भारत द्वारा संचालित शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित है और उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि किसी भी संघर्ष या सैन्य कार्रवाई के दौरान नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने और कूटनीतिक समाधान पर भी जोर दिया।
भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार बंदरगाह?
ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित चाबहार बंदरगाह भारत की रणनीतिक और व्यापारिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। बंदरगाह के दो प्रमुख टर्मिनल हैं—शाहिद बेहिश्ती और शाहिद कलंतरी। इनमें से शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल का संचालन भारत करता है।
इस परियोजना के जरिए भारत को पाकिस्तान के रास्ते पर निर्भर हुए बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी व्यापारिक पहुंच मिलती है। यही वजह है कि इसे भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीति का अहम आधार माना जाता है।
INSTC परियोजना में भी निभाता है अहम भूमिका
भारत और ईरान चाबहार बंदरगाह को 7,200 किलोमीटर लंबे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस कॉरिडोर के माध्यम से भारत, ईरान, रूस और यूरोप के बीच माल परिवहन तेज, सस्ता और अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना पूरी क्षमता से विकसित होती है, तो यह क्षेत्रीय व्यापार के साथ-साथ भारत की सामरिक और आर्थिक स्थिति को भी मजबूती प्रदान करेगी।
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