img-fluid

ढाई साल में कर्मियों के हित में नहीं हुआ एक भी ठोस फैसला

July 20, 2026

  • आरडीवीवी कर्मचारी संघ का कुलगुरु पर बड़ा हमला, कहा…

जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शैक्षणेत्तर कर्मचारी संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन, विशेषकर कुलगुरु की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कर्मचारियों की उपेक्षा का आरोप लगाया है। संघ के अध्यक्ष संजय यादव और महासचिव अंकित श्रीवास द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि पिछले लगभग ढाई वर्षों के कार्यकाल में कर्मचारियों के हित में कोई ठोस एवं सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, जबकि विश्वविद्यालय लगातार प्रशासनिक अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है।



  • कर्मचारी संघ ने कहा कि विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति किसी से छिपी नहीं है। शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं, परीक्षा परिणाम और आवश्यक संसाधनों की समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। मीडिया द्वारा समय-समय पर इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाए जाने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं हो सके हैं। संघ ने आरोप लगाया कि कुलगुरु कार्यालय की कार्यशैली मूलभूत प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के बजाय नोटिस जारी करने तक सीमित होती जा रही है। कर्मचारियों द्वारा निष्ठापूर्वक कार्य करने के बावजूद उन्हें प्रोत्साहन देने के बजाय नोटिस थमाए जा रहे हैं। यहां तक कि कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों द्वारा संवाद स्थापित करने के प्रयासों पर भी नोटिस जारी किए जाने को संघ ने प्रशासनिक संवेदनहीनता बताया। बयान में कहा गया कि लगभग 27 वर्षों से कर्मचारियों को मिलने वाला श्रम साध्य भत्ता समाप्त कर दिया गया। वर्ष 1997 में सृजित 70 पदों की बहाली, वर्ष 2008 के समयमान वेतनमान की अंतर राशि का भुगतान, तकनीकी कर्मचारियों के समयमान वेतनमान, अनुकम्पा नियुक्तियों और अन्य लंबित मामलों पर भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसके चलते कई मामलों में न्यायालयों से कर्मचारियों को राहत मिली, जिससे विश्वविद्यालय पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी पड़ा।
    कर्मचारी संघ ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की स्थिति पर भी चिंता जताई। संघ का कहना है कि पेंशन एवं अन्य देयकों के भुगतान के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को न्यायालयों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं कर्मचारी कल्याण कोष में पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होने से सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली 50 हजार रुपये की सहायता राशि भी कई कर्मचारियों को नहीं मिल पा रही है। संघ का आरोप है कि इस कोष में राशि हस्तांतरित करने का अनुरोध भी कुलगुरु द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। संघ ने यह भी दावा किया कि वर्तमान कार्यप्रणाली के कारण अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक मानसिक तनाव में कार्य करने को विवश हैं। पिछले ढाई वर्षों में लगभग आठ कुलसचिव बदलना भी प्रशासनिक अस्थिरता का उदाहरण बताया गया है। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पदोन्नति संबंधी आदेश अब तक जारी नहीं किए गए हैं। जबकि अन्य विश्वविद्यालयों में पदोन्नति और महंगाई भत्ते के भुगतान जैसे निर्णय लागू हो चुके हैं। इसके विपरीत कार्य परिषद एवं शासन के निर्णय के बाद 13 कर्मचारियों के नियमितीकरण को स्थगित करने तथा नियमों के विपरीत केविएट दायर करने को कर्मचारियों के प्रति नकारात्मक रवैया बताया गया। संघ ने वेतन भुगतान में हो रही देरी का भी मुद्दा उठाते हुए कहा कि मई माह का वेतन 7 जून को मिला, जबकि शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक माह की पहली तारीख को वेतन भुगतान किया जाना चाहिए। कर्मचारी संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि पदोन्नति, नियमितीकरण, लंबित वेतनमान, पेंशन, कर्मचारी कल्याण कोष सहित सभी लंबित मामलों का शीघ्र एवं न्यायसंगत समाधान किया जाए। साथ ही पदोन्नति में हो रही देरी के कारण सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों को पूर्व प्रभाव (बैक डेट) से पदोन्नति का लाभ देने की मांग भी की गई है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो उनके अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।

    Share:

  • इंदौर में हुए अंधे कत्ल का पुलिस ने कुछ ही घंटे में किया पर्दाफाश, सगे भतीजे ने की थी हत्या

    Mon Jul 20 , 2026
    इंदौर। इंदौर के चंदन नगर इलाके में हुए अंधे कत्ल का पुलिस ने कुछ ही घंटों में खुलासा कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि जिस हत्यारे की तलाश पुलिस बाहर कर रही थी, वह घर का ही सदस्य निकला। पुलिस ने मृतक के सगे भतीजे को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved