
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर मंडराते खतरे के बीच भारत (India) ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोवल (Ajit Doval) ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन रहमान (Prince Faisal bin Rahman) से मुलाकात कर रणनीतिक सहयोग, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत बनाने के साथ-साथ तेल आपूर्ति से जुड़े समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया। ईरान से जुड़े तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न परिस्थितियों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच भारत के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत की ऊर्जा जरूरतों में सऊदी की अहम भूमिका
वर्तमान में भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 17 प्रतिशत सऊदी अरब से आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की स्थिति के बाद सऊदी अरब से तेल की आपूर्ति बाब-अल-मंदेब मार्ग के जरिए की जा रही थी। रिपोर्टों के अनुसार, यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से इस समुद्री मार्ग को बाधित करने की चेतावनी के बाद भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हुई हैं। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की प्राथमिकता बन गया है।
‘डोवल डॉक्ट्रिन’ की फिर चर्चा
अजित डोवल की रणनीतिक कार्यशैली को अक्सर ‘डोवल डॉक्ट्रिन’ के नाम से जाना जाता है। उनका एक चर्चित कथन है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में केवल निर्णय लेना ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि उन निर्णयों को सही साबित करना भी उतना ही जरूरी होता है। इसी सोच के साथ भारत पश्चिम एशिया में अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
ऑपरेशन राहत बना था मिसाल
साल 2015 में यमन गृहयुद्ध के दौरान भारत ने ‘ऑपरेशन राहत’ चलाकर लगभग 4,741 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला था। इसके साथ ही करीब 2,000 विदेशी नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया था। उस समय हूती गुट के साथ भारत के औपचारिक संबंध नहीं होने के बावजूद भारतीय खुफिया एजेंसियों ने बैक-चैनल संवाद स्थापित कर राहत अभियान को सफल बनाया। नौसेना और वायुसेना के समन्वित प्रयासों ने इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना दिलाई थी।
मानवीय सहायता से बनाए रखा संवाद
ऑपरेशन राहत के बाद भी भारत ने हूती गुट को औपचारिक मान्यता नहीं दी, लेकिन यमन के लिए मानवीय सहायता जारी रखी। खाद्य सामग्री और दवाओं के रूप में भेजी जाने वाली इस सहायता का एक हिस्सा हूती प्रभाव वाले इलाकों तक भी पहुंचता रहा है। माना जाता है कि इसी मानवीय दृष्टिकोण ने संवाद की संभावनाओं को बनाए रखने में मदद की है।
नौसेना की निगरानी भी जारी
भारतीय नौसेना के जहाज लगातार यमन के आसपास के समुद्री क्षेत्र में निगरानी करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ता है, तो भारत कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा के जरिए भी तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने की कोशिश कर सकता है।
रक्षा सहयोग भी बढ़ सकता है
रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने में भी रुचि दिखा रहा है। बताया जा रहा है कि भारत की स्वदेशी अस्त्र मिसाइल में दिलचस्पी रखने वाले देशों में सऊदी अरब भी शामिल है। भारतीय वायुसेना पहले ही पुष्टि कर चुकी है कि ऑपरेशन सिंदूर में अस्त्र मिसाइल का सफल उपयोग किया गया था। इसके बाद इंडोनेशिया के साथ इस मिसाइल की खरीद को लेकर समझौता भी हुआ है।
लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से होंगे सम्मानित
राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए अजित डोवल को 1 अगस्त को पुणे में लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वर्ष 1983 से दिए जा रहे इस सम्मान से पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों को भी नवाजा जा चुका है।
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