
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे अब यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के साथ-साथ पर्यावरण बचाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठा रहा है। उत्तर मध्य रेलवे ने एक अनोखी पहल करते हुए सोलर-असिस्टेड पैसेंजर कोच तैयार किया है। इस कोच की छत पर सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनकी मदद से हर साल हजारों यूनिट बिजली पैदा होगी। इससे रेलवे का बिजली खर्च कम होगा और प्रदूषण घटाने में भी मदद मिलेगी। फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है।
प्रयागराज मंडल ने हाल ही में इस खास कोच को लॉन्च किया। कोच की छत पर 6.93 किलोवाट क्षमता के 21 सोलर पैनल लगाए गए हैं। इन पैनलों से हर साल करीब 13,400 यूनिट स्वच्छ बिजली तैयार होगी। इस बिजली का इस्तेमाल कोच के पंखे, लाइट और अन्य जरूरी उपकरण चलाने में किया जाएगा।
रेलवे के अनुसार, एक सोलर कोच से हर साल लगभग 2.80 लाख रुपये की बिजली लागत बचेगी। इसके अलावा यह तकनीक हर वर्ष करीब 11 टन कार्बन उत्सर्जन कम करेगी। यानी यह परियोजना आर्थिक बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि जब सोलर पैनलों पर सूर्य की रोशनी पड़ती है, तो उससे बनने वाली बिजली पहले बैटरी बैंक में स्टोर होती है। बाद में उसी बैटरी से कोच के अंदर लगे पंखे और लाइट संचालित किए जाते हैं। इससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होती है और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है।
मुख्य अभियंता पुलकित श्रीवास्तव ने बताया कि इस परियोजना में अधिकतर काम रेलवे के अपने संसाधनों से किया गया है। सोलर पैनलों को सीधे कोच की छत पर लगाया गया है, जिससे अलग ढांचे की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने बताया कि झांसी स्थित रेलवे की दोनों बड़ी वर्कशॉप अब हर महीने दो सोलर कोच तैयार करेंगी। जैसे-जैसे इनका निर्माण होगा, उन्हें अलग-अलग ट्रेनों में शामिल किया जाएगा।
रेलवे का मानना है कि भविष्य में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाकर बिजली की खपत कम की जा सकती है। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश की कई ट्रेनों में ऐसे सोलर कोच देखने को मिल सकते हैं। इससे रेलवे का खर्च घटेगा, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
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