
नई दिल्ली। भगवान शिव (Lord Shiva) को समर्पित पवित्र श्रावण मास (Shravan month) का शुभारंभ 30 जुलाई, गुरुवार से होगा। इस दिन आयुष्मान योग और श्रवण नक्षत्र का संयोग रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चंद्रमा मकर राशि और सूर्य कर्क राशि में विराजमान रहेंगे। श्रावण मास 31 दिनों का होगा और इसका समापन 28 अगस्त को होगा। इस दौरान शिव भक्त सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) और सावन शिवरात्रि (Sawan Shivratri) पर विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। यदि आप पहली बार सावन का व्रत रखने जा रहे हैं, तो पूजा और उपवास के नियमों की जानकारी होना जरूरी है।
सावन व्रत की शुरुआत कब करें?
सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू हो रहा है, लेकिन पहला सावन सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा। इसी दिन से सोमवार व्रत की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। इस वर्ष कुल 4 सावन सोमवार और 4 मंगला गौरी व्रत रहेंगे।
सावन सोमवार की तिथियां
3 अगस्त – पहला सोमवार
10 अगस्त – दूसरा सोमवार
17 अगस्त – तीसरा सोमवार
24 अगस्त – चौथा सोमवार
मंगला गौरी व्रत
4 अगस्त
11 अगस्त
18 अगस्त
25 अगस्त
अन्य प्रमुख तिथियां
10 अगस्त – प्रदोष व्रत
11 अगस्त – सावन शिवरात्रि
25 अगस्त – प्रदोष व्रत
सोमवार व्रत कैसे करें?
यदि आप पहली बार सोमवार व्रत रख रहे हैं, तो 3 अगस्त से इसकी शुरुआत करें और 24 अगस्त को विधि-विधान के साथ उद्यापन करें। कई परंपराओं में पांच सोमवार व्रत का भी प्रचलन है, ऐसे में सावन के चार सोमवार के बाद भाद्रपद के पहले सोमवार को व्रत रखकर उद्यापन किया जाता है।
जो लोग 16 सोमवार व्रत का संकल्प लेना चाहते हैं, वे भी इसकी शुरुआत पहले सावन सोमवार से कर सकते हैं। किसी भी व्रत का उद्यापन करना धार्मिक दृष्टि से आवश्यक माना जाता है।
मंगला गौरी व्रत
महिलाएं 4 अगस्त से मंगला गौरी व्रत की शुरुआत कर सकती हैं, जिसका समापन 25 अगस्त को होगा। यदि आपके परिवार में यह व्रत नहीं किया जाता है, तो केवल सावन सोमवार का व्रत भी रखा जा सकता है।
पहली बार व्रत रखने वाले इन नियमों का रखें ध्यान
– पूरे सावन माह मांस, मदिरा, तंबाकू और अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन न करें।
– ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करें तथा सदाचारपूर्ण जीवन जीने का प्रयास करें।
– व्रत वाले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और जल हाथ में लेकर व्रत व पूजा का संकल्प लें।
– पूजा के दौरान मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का प्रयास करें।
– छल, कपट, क्रोध और द्वेष जैसी नकारात्मक भावनाओं से दूर रहें।
– भगवान शिव के नाम पर किसी भी प्रकार के नशे का सेवन धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं माना जाता।
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
व्रत के दिन शिवलिंग का शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, अक्षत, कच्चा दूध, शहद, चंदन, पुष्प, भांग, धतूरा और शमी पत्र अर्पित करें। पूजा के दौरान पुरुष “ॐ नमः शिवाय” तथा महिलाएं “नमः शिवाय” मंत्र का जाप कर सकती हैं। यदि आपने गुरु मंत्र लिया है तो उसका जप भी किया जा सकता है। पूजा के अंत में शिव चालीसा का पाठ और आरती करें तथा शाम को शिवलिंग के पास दीपक जलाएं।
पूरे सावन रखें शिव भक्ति का भाव
जिन दिनों व्रत न हो, उन दिनों भी भगवान शिव का जलाभिषेक करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो किसी भी व्रत वाले दिन रुद्राभिषेक भी कराया जा सकता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई शिव आराधना से भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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