नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) की व्हाइट हाउस में हुई बैठक के एक दिन बाद पश्चिम एशिया में तनाव (West Asia Tensions) एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने दावा किया है कि जॉर्डन में उसके सैन्य ठिकाने पर हुए मिसाइल हमले के जवाब में ईरान के सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए गए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिकी वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली ने इन मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया। इसके बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बुधवार रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई कार्रवाई शुरू की।
इससे पहले व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच करीब 90 मिनट तक बंद कमरे में बैठक हुई थी। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। बैठक के बाद जारी संयुक्त संदेश में दोनों देशों ने ईरान के खिलाफ साझा रणनीति और सहयोग जारी रखने की बात कही।
यह मुलाकात अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी में शुरू हुए सैन्य संघर्ष के बाद ट्रंप और नेतन्याहू की पहली आमने-सामने की बैठक मानी जा रही है।
जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिकी बलों पर किसी भी हमले का जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा और जिम्मेदार पक्ष को इसकी कीमत चुकानी होगी।
बताया जा रहा है कि जून में हुए संघर्ष विराम के बाद कुछ समय तक हालात अपेक्षाकृत शांत रहे थे, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने क्षेत्र में सैन्य तनाव को फिर बढ़ा दिया है।
इसी बीच अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के ठिकानों पर संयुक्त हवाई अभियान चलाया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि कार्रवाई का लक्ष्य संगठन के हथियार भंडार और रसद केंद्र थे। हमलों के बाद हताहतों की भी खबरें सामने आई हैं, हालांकि स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
हाल के महीनों में ट्रंप और नेतन्याहू के बीच रणनीतिक मतभेदों की चर्चाएं सामने आती रही थीं, लेकिन ताजा बैठक के बाद दोनों सरकारों ने स्पष्ट किया कि ईरान के मुद्दे पर दोनों देशों की नीति एक जैसी है।
इजरायल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू अमेरिकी प्रशासन पर किसी तरह का दबाव नहीं डालते, बल्कि दोनों देशों का साझा उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। व्हाइट हाउस ने भी अपने बयान में दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को दोहराया।
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