
मप्र में 600 पार होम स्टे….110 गांवों में ग्राम स्टे हो रहे तैयार… जल्द ही होंगे 1 हजार, उज्जैन प्रदेश में सबसे आगे
इंदौर, नासेरा मंसूरी।
मध्यप्रदेश (MP) में होम स्टे योजना (Homestay Scheme) अब सिर्फ पहल नहीं, बल्कि ग्राउंड पर सफल मॉडल (Successful model) बनकर तेजी से विस्तार पकड़ रही है। प्रदेशभर में 600 होम स्टे पंजीकृत हो चुके हैं, जबकि 110 चयनित गांवों में ग्राम स्टे तैयार किए जा रहे हैं। इस मॉडल ने ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान दी है और पर्यटकों को सीधे गांव की संस्कृति से जोड़ दिया है। इस योजना के जरिए न सिर्फ पर्यटन बढ़ रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। अब सिंहस्थ के चलते उज्जैन और इंदौर में और भी तैयारियां की जा रही हैं।
मध्यप्रदेश में होम स्टे योजना मूल रूप से वर्ष 2010 में ‘होम स्टे स्थापना (पंजीयन एवं नियमन) योजनाÓ के रूप में शुरू की गई थी, जिसे बाद में ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 2018 और 2019 में संशोधित किया गया। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड कई ग्रामीण जिलों में इसे विस्तार देने में लगा हुआ है, जिस कारण कुछ ही समय में यह मॉडल शहरों से निकलकर गांवों तक पर्यटन पहुंचाने में सफल हो रहा है। इसी योजना से जुड़कर सिर्फ खेती तक सीमित रहने वाले गांव अब पर्यटकों के स्वागत में सज रहे हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में 600 से ज्यादा होम स्टे पंजीकृत हैं। वहीं इस योजना को विस्तारित करने के लिए गांवों में 110 ग्राम स्टे पर काम चल रहा है। जिन गांवों में पहले सन्नाटा रहता था, अब वहां पर्यटकों की आवाजाही है। पन्ना का मडला, छिंदवाड़ा के गांव, इंदौर के बरखेड़ा-गुंजारा जैसे क्षेत्रों में नई रौनक दिखाई दे रही है।
हर श्रेणी को बढ़ाने के प्रयास
अधिकारियों के मुताबिक आगे योजना के अनुसार चयनित ग्रामों की संख्या बढ़ाकर ग्राम स्टे में बढ़ोतरी करना है। साथ ही विलेज टूरिज्म कमेटी का गठन कर उसका पंजीयन करवाना भी लक्ष्य है। फिलहाल अर्बन होम स्टे 144, बेड एंड ब्रेकफास्ट में 94, फॉर्म स्टे 51 और ग्राम स्टे 311 पंजीकृत हैं।
उज्जैन में सबसे ज्यादा रजिस्टर्ड
इंदौर रीजन के अंतर्गत ही आने वाले उज्जैन में सबसे ज्यादा रजिस्टर्ड होम स्टे हैं, जिनकी संख्या 101 है। ये प्रदेश में सबसे ज्यादा है। सिंहस्थ के चलते अभी इसमें और विस्तार किया जा रहा है। उज्जैन के उंडासा गांव में 2 ग्राम स्टे निर्माणाधीन हैं, जबकि इंदौर में ये संख्या 29 है। सिंहस्थ के चलते भी काम किया जा रहा है। इंदौर सिंहस्थ के दौरान एक प्रमुख केंद्र होगा, जिसके चलते मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड आने वाले दिनों में इंदौर में होम स्टे से संबंधित एक कार्यशाला भी करने जा रहा है, ताकि यहां के लोग इसमें रुचि दिखाएं।
भोजन-संस्कृति लुभा रही
पन्ना का मडला, निवाड़ी के लड़पुराखास-राधापुर-बागन, सीहोर का खारी, छिंदवाड़ा के साबरवानी-काजरा-चिमटीपुर-धूसावानी, इंदौर के बरखेड़ा-गुंजारा और खरगोन के बोथू-नवदातोदी जैसे गांव अब पर्यटकों की नई पसंद बन रहे हैं। यहां पर्यटकों की संख्या ज्यादा है। अनुभव आधारित पर्यटन के चलते यहां पर्यटक सिर्फ रुकते नहीं, बल्कि पारंपरिक भोजन, लोक नृत्य, बैलगाड़ी, पॉटरी और घुड़सवारी के जरिए गांव की जीवनशैली को नजदीक से महसूस करते हैं।
उज्जैन में हुई कार्यशाला, 360 ने कराया पंजीयन
इसी योजना और सिंहस्थ की तैयारियों के चलते उज्जैन में होम स्टे योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं स्थानीय नागरिकों को पर्यटन आधारित स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से कार्यशाला आयोजित की गई। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के कौशल प्रकोष्ठ के संचालक डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि 360 इच्छुक हितग्राहियों ने होम स्टे योजना के अंतर्गत पंजीयन कराकर इससे जुड़ने की पहल की। कोई भी नागरिक अपने घर के अतिरिक्त कक्ष से इस योजना की शुरुआत कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकता है।
”प्रदेश में फिलहाल 110 ग्रामों में ग्राम स्टे निर्माण चल रहा है। यह ग्रामीण पर्यटन के अंतर्गत है। जल्द ही प्रदेशभर में होम स्टे की संख्या 1 हजार होगी। हम कोशिश कर रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को देश और प्रदेश की ग्रामीण गतिविधियों और संस्कृति को दिखा सकें। इसके भी प्रयास तेज किए जा रहे हैं। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए फीडबैक रजिस्टर, क्यूआर कोड, ऑनलाइन ओटीए प्लेटफॉर्म है और मॉनीटरिंग टीम लगातार नजर भी बनाए रखती है।
– डॉ. इलैया राजा टी (प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड)
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