
नई दिल्ली: Commonwealth Games 2026 में भारत ने अपने अभियान का अंत 39 मेडल जीतकर और पदक तालिका में चौथे नंबर पर रहकर किया. भारत के अभियान को इतना सफल बनाने में उसके बॉक्सर की भूमिका सबसे अहम रही. भारत के जीते 39 मेडल में से 10 मुक्केबाजों के पंच की बदौलत ही आए. बड़ी बात ये रही कि उन 10 मेडल में से 7 गोल्ड थे. अब भारतीय बॉक्सर ने तो अपनी मेहनत का रंग दिखाते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना अब तक का बेस्ट प्रदर्शन कर दिया. लेकिन, उनकी उस कामयाबी के पीछे जिन लोगों का हाथ रहा, उनकी मेहनत का क्या? हम बात कर रहे हैं भारतीय बॉक्सरों के सपोर्ट स्टाफ की, जिन्हें 3 महीने से सैलरी नहीं मिली है.
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय मुक्केबाजी टीम के 12 सपोर्ट स्टाफ को 3 महीने से वेतन नहीं मिला है. ये वो 12 सदस्य हैं, जिन्होंने NIS पटियाला से लेकर बेलफास्ट में हुई तैयारियों तक, मुक्केबाजों को CWG के लिए तैयार करने में दिन-रात एक कर दिया. जिन सपोर्ट स्टाफ को वेतन नहीं मिला, उनमें द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हेड कोच सी. कुटप्पा भी शामिल हैं.
टीम के हेड कोच के अलावा सपोर्ट स्टाफ में शामिल टीम के डॉक्टर जितिन कृष्णन और येशा पटेल , मनोचिकित्सक मैथिली भूपतानी, वीडियो एनालिस्ट नितिन कुमार और संजीत शर्मा को भी वेतन का इंतजार है. टीम के 3-3 महिला और पुरुष मसाज थेरेपिस्ट को भी सैलरी नहीं मिली है.
अब सबसे पहले तो सवाल ये है कि भारतीय बॉक्सिंग टीम के सपोर्ट स्टाफ की सैलरी कितनी होती है? रिपोर्ट के मुताबिक, कोच की सैलरी डेढ़ से दो लाख रुपये होती है. डॉक्टर को डेढ़ लाख रुपये मिलते हैं. मसाज थेरेपिस्ट को 40 से 50 हजार रुपये मिलते हैं. मनोचिकित्सक को 1 लाख रुपये और वीडियो एनालिस्ट को 80 हजार रुपये तक सैलरी मिलती है.
रिपोर्ट के मुताबिक बॉक्सिंग टीम के कुछ सपोर्ट स्टाफ ने SAI से गुहार लगाते हुए, इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है. सपोर्ट स्टाफ की ओर से कहा गया है कि अगर जल्दी ही सैलरी से संबंधित मामले पर चीजें क्लियर नहीं हुई तो 10 अगस्त से एशियाई खेलों की तैयारियों के लिए NIS पटियाला में लगने वाले नेशनल शिविर पर उसका असर दिखेगा. उनके लिए उसमें भाग लेना मुश्किल होगा.
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