
नई दिल्ली. अमेरिका (US) और ईरान (Iran) के बीच बातचीत को लेकर एक बार फिर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है और इसे होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) खोलने के समझौते की दिशा में अहम कदम बताया. हालांकि, ईरान ने साफ कहा कि अमेरिका के साथ न तो कोई बातचीत चल रही है और न ही सोमवार को किसी बैठक की योजना थी. इस बीच आज बुधवार को ईरान-ओमान के बीच बातचीत जरूर चल रही है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग कॉरिडोर बनाने पर चर्चा हो रही है.
कतर, ओमान और पाकिस्तान की मध्यस्थता से कूटनीतिक कोशिशें जरूर जारी हैं, लेकिन तेहरान ने सीधे अमेरिका-ईरान वार्ता से इनकार किया है. हालांकि, ट्रंप ने मध्यस्थ की लिस्ट में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया है. ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा था कि ईरान से बातचीत “चल रही है”.
राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान के साथ-साथ सऊदी अरब, यूएई और कतर ने भी बातचीत का रास्ता अपनाने के लिए कहा है. ट्रंप ने इसे ईरान के लिए “आखिरी मौका” बताते हुए कहा कि अगर तेहरान तैयार हो तो एक अच्छा समझौता किया जा सकता है. दूसरी तरफ ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका के साथ किसी नई बातचीत की योजना नहीं है.
होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर ईरान-ओमान में चल रही वार्ता
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी अमेरिका और ईरान के बयानों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने दावा किया कि आज या कल ऐसा समझौता हो सकता है, जिससे स्ट्रेट को खोलने और क्षेत्र में हालात सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सके. वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ओमान और ईरान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है.
मार्को रुबियो के मुताबिक, फिलहाल सबसे बड़ा फोकस कम समय में ज्यादा से ज्यादा कारोबारी जहाजों को सुरक्षित तरीके से होर्मुज से निकालने पर है. इसके बाद अमेरिका की नजर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर है. उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े और अंतिम समझौते का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके.
ईरान की शर्तों पर नहीं बन पा रही सहमति
वहीं, होर्मुज को खोलने की कोशिशों के बीच अभी भी कई अड़चनें बनी हुई हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और ओमान के बीच एक अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर को लेकर चर्चा हो रही है, लेकिन रास्ते के इस्तेमाल, संभावित शुल्क और ईरान की शर्तों पर सहमति बाकी है. अमेरिकी पक्ष ईरान की ओर से किसी तरह के टोल या शुल्क लगाने के खिलाफ है.
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