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Meta पर ₹5,000 करोड़ का जुर्माना, जाने कोर्ट ने किस नियम के तहत सुनाया ये बड़ा फैसला

August 07, 2026

नई दिल्ली। सोशल मीडिया कंपनी Meta को बच्चों और युवाओं (Children and Youth) की सुरक्षा से जुड़े मामले में बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के न्यू मैक्सिको की एक अदालत (Court) ने कंपनी पर 567 मिलियन डॉलर यानी करीब 5,000 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने माना कि Meta के प्लेटफॉर्म से बच्चों और युवाओं को नुकसान पहुंचा और कंपनी को इससे जुड़े नुकसान की भरपाई करनी होगी।

यह मामला इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी Meta के खिलाफ चल रहे मुकदमे के दूसरे चरण से जुड़ा है। इससे पहले मार्च में भी कंपनी के खिलाफ फैसला आया था। अदालत ने अपने निर्णय में अमेरिका के चिल्ड्रन ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट (COPPA) का हवाला दिया।

क्या है COPPA कानून?
अमेरिका का COPPA कानून 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की ऑनलाइन गोपनीयता की सुरक्षा से संबंधित है। इसके तहत बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी जुटाने और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करने को लेकर कंपनियों पर सख्त नियम लागू होते हैं।

युवाओं के इलाज और मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च होगी रकम
गुरुवार देर रात जारी फैसले में जज ब्रायन बीडशाइड ने कहा कि जुर्माने की बड़ी राशि युवाओं के इलाज और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च की जाएगी। करीब 420 मिलियन डॉलर इन सेवाओं के लिए निर्धारित किए जाएंगे। शेष राशि अगले पांच वर्षों में जागरूकता और रोकथाम कार्यक्रमों, स्क्रीनिंग सेवाओं तथा अन्य संबंधित गतिविधियों पर खर्च होगी।


  • पहले भी लगाया जा चुका है 375 मिलियन डॉलर का जुर्माना
    मामले के पहले चरण में अदालत ने Meta पर 375 मिलियन डॉलर का सिविल जुर्माना लगाया था। अदालत के मुताबिक कंपनी को इस बात की जानकारी थी कि उसके प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। इसके अलावा कंपनी पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित जानकारी छिपाने का भी आरोप लगाया गया।

    प्लेटफॉर्म में बदलाव की मांग
    अभियोजन पक्ष ने Meta के प्लेटफॉर्म में कई बड़े बदलाव लागू करने की मांग की है। इनमें यूजर्स को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने वाली सुविधाओं पर नियंत्रण, उम्र सत्यापन की व्यवस्था को मजबूत करना, डिफॉल्ट प्राइवेसी सेटिंग्स में बदलाव और बच्चों के यौन शोषण को रोकने के लिए कड़ी निगरानी जैसे कदम शामिल हैं।

    अदालत ने यह भी कहा कि केवल Meta पर बच्चों की उम्र सत्यापित करने की जिम्मेदारी डालना उचित नहीं होगा, जबकि अन्य सोशल मीडिया कंपनियों पर ऐसी बाध्यता न हो।

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