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PoK में प्रदर्शनकारियों के आगे झुकी शहबाज की पार्टी, पहले आतंकी बताया अब देशभक्त कहा

August 09, 2026

नई दिल्ली: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कई महीनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) का रुख बदलता दिख रहा है. शनिवार को प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि प्रदर्शन करने वाले 99% लोग देशभक्त हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के नेता जल्द ही प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के सदस्यों से मुलाकात करेंगे.

JAAC में समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल हैं. इनमें छात्र, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं. यह संगठन पिछले दो महीने से ज्यादा समय से PoK में प्रदर्शन कर रहा है. PoK की क्षेत्रीय सरकार ने जून में JAAC को प्रतिबंधित कर दिया था. खास बात यह है कि कुछ दिन पहले तक PML-N प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को सही ठहराती रही थी. पार्टी का आरोप था कि प्रदर्शनकारियों के बीच प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के सदस्य भी मौजूद हैं. अब पार्टी के इस बदले रुख को प्रदर्शनकारियों के दबाव के तौर पर देखा जा रहा है.


  • JAAC के साथ बैठक करेगी PML-N
    PoK में चुनाव के तीसरे चरण से पहले शनिवार को एक रैली में राणा सनाउल्लाह ने कहा कि JAAC से जुड़े 99% लोग हमारे देशभक्त भाई हैं. उन्होंने कहा कि अगर PML-N दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाती है, तो वह JAAC के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगी. इस बैठक में विवाद को सुलझाना सरकार का पहला काम होगा.

    PoK विधानसभा में 45 निर्वाचित सीटें हैं. अब तक चुनाव के दो चरण हो चुके हैं. इनमें PML-N ने 25 सीटें जीत ली हैं, यानी वह बहुमत के आंकड़े से आगे निकल गई है. उसका सीधा मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से है. PPP पाकिस्तान की केंद्र सरकार में PML-N की गठबंधन सहयोगी है. तीसरे चरण में सोमवार को 4 सीटों पर मतदान होगा, जबकि 7 सीटों पर चुनाव अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए हैं.

    JAAC ने क्या मांगें रखी हैं?
    JAAC की मुख्य मांग PoK की 12 विवादित शरणार्थी सीटों को खत्म करना है. संगठन का आरोप है कि इन सीटों के जरिए वहां अपनी पसंद का प्रधानमंत्री चुनने में मदद की जाती है. प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान ने चिंता जताई है और घटनाओं की जांच की मांग की है.

    27 जुलाई को चुनाव शुरू होने के बाद तनाव और बढ़ गया. JAAC का दावा है कि चुनाव शुरू होने के बाद महिलाओं और बच्चों समेत 40 से ज्यादा लोग मारे गए. संगठन का यह भी दावा है कि जून के पहले सप्ताह से अब तक 400 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं. हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने नागरिकों की मौत से इनकार किया है और इन आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया है.

    7 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र ने भी PoK की सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताई. UN ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ हुई कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई. भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं. भारत यह भी कहता है कि पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है.

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