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सीरिया में जमीन के नीचे छिपा है ‘येलोकेक’! असद के गुप्त परमाणु कार्यक्रम का मटेरियल हटाने की तैयारी, अमेरिका-इजरायल भी शामिल

August 11, 2026

नई दिल्ली। सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद (Bashar Al Assad) के शासनकाल के कथित गुप्त परमाणु कार्यक्रम से जुड़े परमाणु मटेरियल (Nuclear material) को अब सुरक्षित तरीके से हटाने की तैयारी की जा रही है। यह मटेरियल एक गुप्त स्थान पर जमीन के नीचे दबाकर रखा गया है। इसे लेकर अमेरिका, इजरायल और सीरिया के बीच कई महीनों से बातचीत चल रही थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA की अहम भूमिका होगी। एजेंसी जल्द ही जमीन के नीचे रखे इस मटेरियल को सुरक्षित तरीके से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

‘साइट 99’ पर इजरायल की थी नजर

बताया गया है कि इजरायल पिछले करीब दो वर्षों से सीरिया में स्थित एक जगह पर नजर रख रहा था। इस जगह को ‘साइट 99’ के नाम से जाना जाता है।

अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, असद सरकार ने अल-किबर परमाणु परियोजना से जुड़े कुछ मटेरियल को इस स्थान पर छिपाकर रखा था। इसी में येलोकेक भी शामिल बताया जा रहा है।

येलोकेक यूरेनियम से तैयार किया गया एक पाउडर होता है, जिसका इस्तेमाल आगे परमाणु ईंधन तैयार करने की प्रक्रिया में किया जा सकता है। हालांकि अधिकारियों के मुताबिक, साइट 99 में मौजूद मटेरियल से सीधे परमाणु हथियार बनाना संभव नहीं है।


  • 2007 में इजरायल ने तबाह किया था अल-किबर

    यह पूरा मामला सीरिया के पुराने और कथित गुप्त परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है। असद सरकार पर आरोप था कि उसने अल-किबर में एक गुप्त परमाणु रिएक्टर तैयार किया था।

    साल 2007 में इजरायल ने हवाई हमला कर इस साइट को नष्ट कर दिया था। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा कुछ मटेरियल कथित तौर पर दूसरी जगहों पर मौजूद रहा।

    बाद में IAEA की जांच में सीरिया के अलग-अलग स्थानों पर यूरेनियम के कण पाए गए थे। इन कणों की मौजूदगी को लेकर लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे।

    इजरायल ने दी थी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

    रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल को आशंका थी कि सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार या कोई अन्य समूह साइट 99 में मौजूद परमाणु मटेरियल तक पहुंच हासिल कर सकता है।

    इजरायल ने अमेरिका को कथित तौर पर स्पष्ट कर दिया था कि वह इस मटेरियल को वहां बने रहने नहीं देगा। यहां तक कि जरूरत पड़ने पर साइट पर दोबारा सैन्य हमला करने की चेतावनी भी दी गई थी।

    इसके बाद अमेरिका ने इजरायल से सैन्य कार्रवाई से बचने और कूटनीतिक रास्ता अपनाने को कहा। इसी कोशिश के तहत IAEA को मामले में शामिल किया गया।

    IAEA और सीरिया के बीच बनी सहमति

    अमेरिकी प्रयासों के बाद करीब तीन सप्ताह पहले IAEA और सीरिया की नई सरकार के बीच एक समझौता हुआ। इसके तहत साइट 99 में मौजूद परमाणु मटेरियल को वहां से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जानी है।

    फिलहाल मटेरियल को हटाया नहीं गया है और इसकी तैयारी चल रही है। अमेरिकी अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही IAEA की निगरानी में इसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, अगर योजना के अनुसार काम आगे बढ़ता है तो इस साल के अंत तक साइट 99 से परमाणु मटेरियल हटाने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इससे सीरिया के पुराने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े संवेदनशील मटेरियल के गलत हाथों में जाने का जोखिम भी कम होगा।

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