
नई दिल्ली। थाईलैंड (Thailand)के चायफुम प्रांत(Chayphum Province) में एक सूखते तालाब (Pond)ने वैज्ञानिकों के सामने करीब 10 करोड़ साल पुराना ऐसा रहस्य खोल दिया है जिसने डायनासोर (Dinosaur)के इतिहास को लेकर नई जानकारी सामने ला दी है। तालाब का पानी कम होने के बाद किनारे पर दिखाई दिए कुछ अजीब और भारी पत्थरों को शुरुआत में सामान्य चट्टान समझा गया था लेकिन वैज्ञानिकों की जांच में पता चला कि ये किसी विशालकाय डायनासोर की जीवाश्म हड्डियां हैं। शोध के बाद वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति का नाम नागाटाइटन चायफुमेंसिस रखा है और इसे दक्षिण पूर्व एशिया में मिले सबसे बड़े डायनासोरों में शामिल किया गया है।
यह खोज वर्ष 2016 में उस समय सामने आई जब चायफुम क्षेत्र में स्थित तालाब का पानी सूख गया था। पानी के नीचे दबे अवशेष धीरे धीरे जमीन की सतह पर दिखाई देने लगे। वैज्ञानिकों ने जब इनकी व्यवस्थित खुदाई और जांच शुरू की तो वहां से एक ही विशाल जीव के शरीर से जुड़ी कई हड्डियां मिलीं। इनमें रीढ़ की हड्डी पसलियां कूल्हे की हड्डियां तथा दाहिने पैर और हाथ के हिस्से शामिल थे। जीवाश्मों की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी ऊपरी बांह की हड्डी ही करीब 1.78 मीटर लंबी थी।
वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक नागाटाइटन चायफुमेंसिस का वजन करीब 25 से 28 टन रहा होगा। यह वजन लगभग नौ एशियाई हाथियों के बराबर माना जा सकता है। इसकी लंबाई सिर से पूंछ तक करीब 27 मीटर रही होगी। यह विशालकाय सॉरोपॉड डायनासोर शाकाहारी था और अपने विशाल शरीर के बावजूद उस दौर के वातावरण में आसानी से भोजन की तलाश में घूमता रहा होगा।
वैज्ञानिक इस जीव को द लास्ट टाइटन यानी आखिरी टाइटन भी कह रहे हैं। इसके पीछे इसकी भूगर्भीय स्थिति को प्रमुख कारण माना जाता है। इसके जीवाश्म थाईलैंड की अपेक्षाकृत कम उम्र वाली खोक क्रुआट फॉर्मेशन की चट्टानों से मिले हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक इसके बाद इस क्षेत्र की परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया और यहां उथले समुद्र का प्रभाव बढ़ गया। ऐसे वातावरण में विशाल स्थलीय सॉरोपॉड के रहने और उनके अवशेषों के संरक्षित होने की संभावना काफी कम हो गई। इसलिए नागाटाइटन को इस क्षेत्र के बड़े सॉरोपॉड डायनासोरों के अंतिम रिकॉर्ड में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
करीब 10 करोड़ साल पहले थाईलैंड का भूगोल और पर्यावरण आज से बिल्कुल अलग था। उस समय यहां गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क परिस्थितियां थीं तथा चौड़ी नदियां इस भूभाग से होकर गुजरती थीं। इन जलस्रोतों में प्राचीन मछलियां मगरमच्छ और मीठे पानी में रहने वाली शार्क जैसी प्रजातियां मौजूद थीं। जमीन पर नागाटाइटन जैसे विशाल शाकाहारी डायनासोर घूमते थे जबकि छोटे शाकाहारी जीव और स्पिनोसॉर जैसे बड़े मांसाहारी डायनासोर भी इसी पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा थे।
नागाटाइटन की खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वैज्ञानिकों को दक्षिण पूर्व एशिया में डायनासोरों के विकास और उनके तत्कालीन पर्यावरण को समझने में मदद मिल सकती है। इस विशाल जीव की हड्डियों को सिरिंधोर्न संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है जहां शोधकर्ता इनका अध्ययन कर रहे हैं।
थाईलैंड में अब तक आधिकारिक रूप से नाम दिए गए डायनासोरों की संख्या 14 हो चुकी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि देश के विभिन्न संग्रहालयों और शोध संस्थानों में अभी बड़ी संख्या में जीवाश्म मौजूद हैं जिनका विस्तृत अध्ययन होना बाकी है। ऐसे में आने वाले वर्षों में डायनासोर की नई प्रजातियों और प्राचीन पर्यावरण से जुड़े कई और रहस्य सामने आने की संभावना है।
आज नागाटाइटन चायफुमेंसिस का विशाल मॉडल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करीब 27 मीटर लंबे इस जीव की कल्पना ही बताती है कि करोड़ों साल पहले धरती पर किस आकार के विशालकाय जीव विचरण करते थे। एक साधारण तालाब के सूखने से सामने आया यह जीवाश्म अब न सिर्फ थाईलैंड बल्कि पूरे दक्षिण पूर्व एशिया के प्रागैतिहासिक इतिहास की अहम कड़ी बन गया है।
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