
नई दिल्ली ।भारत (India) और श्रीलंका (Sri Lanka) के बीच 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाले पहले टेस्ट मैच से पहले पिच (Pitch) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मुकाबले से पहले गॉल की सतह किस तरह का व्यवहार करेगी, इस पर भारतीय टीम की रणनीति काफी हद तक निर्भर कर सकती है। खास तौर पर गेंदबाजी संयोजन (Bowling Combination)को लेकर टीम प्रबंधन परिस्थितियों (Conditions)का बारीकी से आकलन कर रहा है।
भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने श्रीलंकाई टीम के अभ्यास सत्र के दौरान गॉल मैदान पहुंचकर पिच का निरीक्षण किया। दोनों कोच सीधे 22 गज की पट्टी तक गए और ग्राउंड स्टाफ की मौजूदगी में विकेट की स्थिति को देखा। निरीक्षण के दौरान पिच को कवर से हटाकर सतह का जायजा लिया गया।
गंभीर और कोटक के मैदान से लौटने के बाद पिच को फिर ढक दिया गया। हालांकि, करीब दो घंटे बाद ग्राउंड स्टाफ ने मुख्य कवर हटाकर विकेट पर काम शुरू किया। इस दौरान घास काटने वाली मशीन का इस्तेमाल किया गया और 22 गज की पट्टी पर मशीन कई बार चलाई गई। इसके बाद सॉफ्ट रोलर का इस्तेमाल हुआ और कुछ समय के लिए विकेट को धूप में खुला रखा गया।
पिच पर हुई इस प्रक्रिया का मतलब यह नहीं है कि मुकाबले की अंतिम सतह तय हो चुकी है। अगले दो दिनों में घास की मात्रा, पानी का इस्तेमाल, धूप और रोलिंग जैसे कारक विकेट के अंतिम स्वरूप को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि भारतीय टीम अंतिम एकादश और गेंदबाजी संयोजन तय करने से पहले पिच की स्थिति पर लगातार नजर रखेगी।
गॉल की पिच आम तौर पर स्पिन गेंदबाजों के लिए उपयोगी मानी जाती है, लेकिन भारतीय टीम केवल इस परंपरागत धारणा के आधार पर अपना संयोजन तय नहीं करना चाहती। मैच के शुरुआती चरण में अगर सतह अपेक्षाकृत सूखी और सपाट रहती है तो तेज गेंदबाजों को भी भूमिका मिल सकती है। दूसरी ओर, पिच के सूखने और टूटने की स्थिति में स्पिन विभाग का महत्व बढ़ सकता है।
भारतीय टीम के सामने तीन तेज गेंदबाजों के साथ उतरने का विकल्प भी मौजूद है। मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार जैसे विकल्प परिस्थितियों के आधार पर उपयोग किए जा सकते हैं। वहीं अतिरिक्त स्पिनर के तौर पर कुलदीप यादव की दावेदारी महत्वपूर्ण हो सकती है। रवींद्र जडेजा अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों क्षमताओं के कारण टीम संतुलन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मौसम भी गॉल टेस्ट की परिस्थितियों को प्रभावित कर सकता है। हाल के दिनों में बारिश और धूप दोनों तरह की स्थितियां देखने को मिली हैं। यदि मैच के दौरान बादल और नमी रहती है तो तेज गेंदबाजों को शुरुआती मदद मिल सकती है। लगातार धूप निकलने पर पिच तेजी से सूख सकती है और मुकाबला आगे बढ़ने के साथ स्पिनरों के लिए परिस्थितियां बेहतर हो सकती हैं।
भारतीय टीम ने 11 और 12 अगस्त को अभ्यास से ब्रेक लिया था। इससे पहले खिलाड़ियों ने कोलंबो में अभ्यास सत्र और तीन दिवसीय वॉर्म-अप मुकाबले के जरिए पर्याप्त तैयारी की। ऐसे में अब गॉल की पिच का बदलता मिजाज टीम की रणनीति के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल है।
गंभीर और कोटक का पिच निरीक्षण तथा उसके बाद विकेट पर हुई कटिंग और रोलिंग ने मुकाबले से पहले इस सतह को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अगले दो दिनों में पिच पर होने वाला काम यह संकेत देगा कि 15 अगस्त से शुरू होने वाले टेस्ट में तेज गेंदबाजों या स्पिनरों में से किसे परिस्थितियों का अधिक लाभ मिल सकता है।
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