
नई दिल्ली । भारतीय रेलवे (Indian Railways) की सफाई व्यवस्था को लेकर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने यात्री सुविधाओं और रखरखाव व्यवस्था से जुड़ी कई कमियों को सामने रखा है। रिपोर्ट में ट्रेन यात्रा के दौरान टॉयलेट (Toilets)की स्थिति, ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग (Housekeeping )सेवाओं और सफाई व्यवस्था(Cleanliness ) को लेकर यात्रियों की असंतुष्टि का उल्लेख किया गया है। सर्वेक्षण में 40 प्रतिशत से अधिक यात्रियों ने टॉयलेट में बदबू और जलभराव जैसी समस्याओं पर नाराजगी जताई।
लंबी दूरी की ट्रेनों में टॉयलेट यात्रियों के लिए जरूरी सुविधा है। ऐसे में इसकी नियमित सफाई, पानी की उपलब्धता और उचित रखरखाव यात्रा की गुणवत्ता पर सीधा असर डालता है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग यानी ओबीएचएस सेवाओं और सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर भी आधे से ज्यादा यात्रियों ने असंतोष व्यक्त किया।
CAG की रिपोर्ट में केवल यात्रियों की शिकायतों तक मामला सीमित नहीं रहा। इसमें रेलवे की सफाई व्यवस्था के लिए निर्धारित बजट के इस्तेमाल और वित्तीय निगरानी पर भी सवाल उठाए गए हैं। ऑडिट के दौरान सफाई और रखरखाव पर वास्तविक रूप से कितनी राशि खर्च हुई, इसका पारदर्शी और समेकित लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई।
रेलवे स्वच्छता और रखरखाव के लिए बड़ी धनराशि आवंटित करता है, लेकिन रिपोर्ट में बजटीय प्रावधान और जमीनी स्तर पर खर्च के बीच स्पष्टता की कमी का उल्लेख किया गया है। इससे यह सवाल उठता है कि उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के लिए कितनी प्रभावी तरीके से किया गया।
ठेकेदारों की जवाबदेही से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर भी ऑडिट में कमियां सामने आईं। नियमों का पालन नहीं करने वाले ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने या भुगतान से राशि काटने की कार्रवाई के लिए कोई केंद्रीय और पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जा सका। रेलवे की ओर से कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई, लेकिन उसके समर्थन में आवश्यक दस्तावेज और कुल जुर्माने की राशि का स्पष्ट विवरण ऑडिट टीम को नहीं मिल सका।
यात्रियों के अनुभव से जुड़ा सर्वेक्षण इस रिपोर्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें 40 प्रतिशत से अधिक यात्रियों ने टॉयलेट में बदबू और जलभराव की समस्या बताई। वहीं 50 प्रतिशत से ज्यादा यात्रियों ने ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग सेवाओं और सफाई कर्मचारियों की अनुपलब्धता को लेकर असंतोष जाहिर किया।
रेलवे में डिब्बों की सफाई को आधुनिक बनाने के लिए ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट जैसी परियोजनाएं भी प्रस्तावित की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, स्वीकृत परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन अपेक्षित स्तर पर नहीं हो सका। कुछ प्रमुख स्टेशनों के लिए बजट उपलब्ध होने के बावजूद परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पाईं।
झांसी और ग्वालियर जैसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों से जुड़ी परियोजनाओं का लंबित रहना भी इस व्यवस्था की चुनौती को दर्शाता है। आधुनिक सफाई सुविधाओं का उद्देश्य ट्रेनों और कोचों की सफाई को अधिक प्रभावी और नियमित बनाना है, लेकिन परियोजनाओं के समय पर पूरा नहीं होने से इनका लाभ यात्रियों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
CAG की रिपोर्ट के निष्कर्ष रेलवे के सामने केवल सफाई सुधारने की नहीं, बल्कि बजट प्रबंधन, निगरानी और जवाबदेही मजबूत करने की जरूरत भी बताते हैं। यात्रियों की शिकायतों को नियमित रूप से दर्ज कर उनका समाधान करना, ठेकेदारों के प्रदर्शन की निगरानी करना और स्वीकृत परियोजनाओं को समय पर पूरा करना इस व्यवस्था में सुधार के महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
ट्रेन यात्रियों के लिए स्वच्छ टॉयलेट और बेहतर हाउसकीपिंग केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि यात्रा के दौरान बुनियादी स्वच्छता से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में रिपोर्ट में सामने आई कमियों पर प्रभावी कार्रवाई और नियमित निगरानी से रेलवे की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved