
नई दिल्ली । नीट विरोधी प्रदर्शनकारियों के फेस रिकग्निशन को लेकर (Regarding Face Recognition of anti-NEET Protesters) सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा (Supreme Court will hear Matter) ।
दिल्ली में नीट यूजी पेपर लीक को लेकर जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने की तकनीक) के इस्तेमाल के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के खिलाफ दाखिल याचिकाओं के साथ इस याचिका को भी सुनवाई के लिए जोड़ने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता की वकील मेनका गुरुस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए फेशियल रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल कर रही है और इससे जुड़ा डेटा निजी कंपनियों के पास रखा जा रहा है।
बता दें कि 6 अगस्त को नीट-यूजी 2026 पेपर लीक से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं से जवाब मांगा था। मामले की अगली सुनवाई अब 19 अगस्त को होगी। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा था, “हलफनामे में कई ऐसी बातें हैं, जिन पर विचार और चर्चा की जाएगी।”
याचिकाओं में परीक्षा कराने वाली संस्था एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे कि एनटीए को बदला जाए या उसकी जगह एक नई संस्था बनाई जाए। उनकी मांग है कि नई संस्था तकनीकी रूप से मजबूत हो, ज्यादा सुरक्षित हो और स्वतंत्र तरीके से काम कर सके ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं न हों।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। सरकार के मुताबिक 2026 में बने नए कानून के तहत अब पेपर लीक या नकल जैसे अपराधों में 10 साल तक की जेल और 5 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स भी बनाई गई है। यह टास्क फोर्स मौजूदा परीक्षा सिस्टम में सुधार के सुझाव देगी।
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