
इस्लामाबाद। आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा पाकिस्तान (Pakistan) अब अपना पहला लूनर रोवर (First Lunar Rover) (चांद पर जाने वाला रोवर) भेजने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। गुरुवार को इस रोवर के नाम का भी ऐलान किया गया। पिछले कई दिनों से जारी नामों की लिस्ट के बीच इस्लामाबाद (Islamabad) ने रोवर का नाम ‘जिन्ना-1’ रखा है। यह नाम पाकिस्तान के कायद-ए-आजम मोहम्मद अली जिन्ना की याद में रखा गया है।
पाकिस्तान की अंतरिक्ष के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था स्पेस एंड अपर एटमॉस्फियर रिसर्च कमीशन (SUPARCO) ने गुरुवार को इसके नाम का ऐलान किया। गौरतलब है कि यह रोवर 2029 में चीन के चांग-ई-8 मिशन के साथ में चांद पर भेजे जाने की संभावना है। यहां पर यह दक्षिणी ध्रुव वाले इलाके में काम करेगा। लगातार आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे देश पाकिस्तान के लिए अंतरिक्ष के क्षेत्र में यह एक बड़ा मौका है। यह एक वैज्ञानिक प्रयोग से ज्यादा चांद पर पाकिस्तानी टेक्नोलॉजी को सीधे तौर पर पहुंचने की भी कोशिश है।
पहले रोवर के नाम के लिए पाकिस्तान में मांगे गए थे सुझाव
पाकिस्तान अपने पहले लूनर रोवर के नाम को लेकर बेहद उत्साहित था। ऐसे में एजेंसी ने इसके लिए एक सार्वजनिक प्रतियोगिता का आयोजन किया था। पाकिस्तानी मीडिया कि रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रतियोगिता में रोवर के नाम के लिए करीब 4,000 से ज्यादा सुझाव आए थे। इसमें मोहम्मद अली जिन्ना के नाम पर इसे ‘जिन्ना-1’ चुना गया।
चांद पर क्या करेगा पाकिस्तान का ‘जिन्ना-1’
पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी ने जिन्ना-1 के संभावित मिशन के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2029 में होने वाले इस मिशन में रोवर चांद के सबसे मुश्किल दक्षिणी ध्रुव पर वैज्ञानिक जांच करेगा। यह मुख्य रूप से चांद की सतह की विशेषताओं, प्लाज्मा और रेडिएशन का अध्ययन करेगा। साथ ही, यह भविष्य के लूनर मिशनों और चांद पर इंसानी गतिविधियों को लंबे समय तक बनाए रखने की संभावनाओं से जुड़े प्रयोगों में भी योगदान देगा।
गौरतलब है कि भारत ने भी कुछ समय पहले अपनी दम पर चांद की दक्षिणी सतह पर अपना रोवर लैंड किया था। इसने अपना मिशन भी पूरा किया था।
पाकिस्तान का लूनर मिशन
पाकिस्तान का लूनर रोवर प्रोजेक्ट अंतरिक्ष मिशन में चीन के साथ देश के बढ़ते सहयोग को भी दर्शाता है। चीन का चांग-ए-8 मिशन, चंद्रमा पर वैज्ञानिक रिसर्च और भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए चीन की व्यापक योजनाओं का हिस्सा है। अब इस रोवर के जरिए पाकिस्तान भी अपना झंड़ा अंतरिक्ष में पहुंचाने की राह पर है।
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