
नई दिल्ली। नेपाल(Nepal) के पोखरा(Pokhara) में पूर्व गोरखा सैनिकों(former Gurkha soldiers)और उनके समर्थकों ने भारतीय सेना (Indian Army)में नेपाली युवाओं की भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नेपाली युवाओं को गल्फ देशों में रोजगार तलाशने के लिए मजबूर करने के बजाय भारतीय सेना में अग्निवीर के तौर पर सेवा करने का अवसर मिलना चाहिए। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के नेपाल दौरे की तैयारियां चल रही हैं। जनरल सेठ 16 अगस्त से नेपाल के पांच दिवसीय दौरे पर जाने वाले हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार 12 अगस्त को पोखरा में इंडियन एक्स सर्विसमैन गोरखा ब्रिगेड नेपाल पोखरा की ओर से प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसमें पूर्व सैनिकों के साथ उनके परिवारों और नेपाली युवाओं ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन कार्यालय के माध्यम से नेपाल की संघीय सरकार को दो सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। उनकी प्रमुख मांग भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती तत्काल फिर शुरू करना है। इसके साथ ही सैनिक शब्द वाले पूर्व सैनिक संगठनों के नवीनीकरण की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
गोरखा सैनिकों और भारतीय सेना के बीच संबंधों का इतिहास काफी पुराना है। नेपाली नागरिक लंबे समय से भारतीय सेना में सेवा देते रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों का कहना है कि इस परंपरा ने कई पीढ़ियों को रोजगार और सम्मान दिया है। उनके मुताबिक भर्ती रुकने से बड़ी संख्या में नेपाली युवाओं के लिए सेना में जाने का रास्ता बंद हुआ है और इसका असर उन परिवारों पर भी पड़ा है जिनकी पीढ़ियां भारतीय सेना से जुड़ी रही हैं।
भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती का मुद्दा अग्निपथ योजना लागू होने के बाद जटिल हो गया। भारत ने 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसके तहत अग्निवीरों की शुरुआती सेवा अवधि चार साल होती है और प्रदर्शन तथा सेना की जरूरत के आधार पर अधिकतम 25 प्रतिशत तक अग्निवीरों को आगे लंबी सेवा के लिए रखा जा सकता है। बाकी अग्निवीर सेवा पूरी होने के बाद बाहर आते हैं और उन्हें निर्धारित एकमुश्त राशि मिलती है। नेपाल सरकार ने इसी चार साल की सेवा व्यवस्था और उसके बाद युवाओं के भविष्य को लेकर सवाल उठाते हुए नेपाली युवाओं की भर्ती को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी।
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान भी इस मुद्दे पर कह चुके हैं कि अब फैसला नेपाल सरकार को करना है। उनका कहना था कि नेपाली नागरिकों के लिए अलग और भारतीय नागरिकों के लिए अलग भर्ती व्यवस्था नहीं हो सकती। ऐसे में नेपाल को तय करना होगा कि वह अग्निपथ योजना के तहत अपने युवाओं को भारतीय सेना में भेजना चाहता है या नहीं।
पोखरा में प्रदर्शन कर रहे पूर्व गोरखा सैनिकों ने साफ किया है कि वे इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर भर्ती जल्द शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों की यह मांग अब भारत नेपाल संबंधों और गोरखा भर्ती की पुरानी परंपरा के बीच एक अहम मुद्दे के तौर पर सामने आई है। वहीं भारतीय सेना प्रमुख के प्रस्तावित नेपाल दौरे से पहले इस प्रदर्शन ने पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है।
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