
नई दिल्ली. 15 अगस्त 2026 को भारत (India) अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) मना रहा था. दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले (Red Fort) की प्राचीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने लगातार 13वीं बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया. सुबह गार्ड ऑफ ऑनर के बाद मोदी ने कैप्टन सोनिया सिंह चौहान की सहायता से तिरंगा फहराया. साथ ही 21 तोपों की सलामी दी गई और भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टरों से फूलों की बारिश हुई. एक हेलिकॉप्टर पर तिरंगा और दूसरे पर वंदे मातरम का झंडा था.
इस साल की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि लाल किले पर पहली बार आधिकारिक रूप से वंदे मातरम गाया गया. राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सेना के बैंड ने इसकी धुन बजाई और उपस्थित सभी लोग इसमें शामिल हुए. बाद में एनसीसी कैडेट्स और माय भारत के स्वयंसेवकों ने भी सामूहिक गायन किया.
यह पल न सिर्फ गौरवपूर्ण था बल्कि युवा शक्ति और विकसित भारत 2047 के संकल्प को भी दिखाता है. पीएम मोदी के संबोधन से पहले और बाद में वंदे मातरम की गूंज पूरे परिसर में फैल गई.
13 वर्षों की पगड़ी परंपरा: रंग, संस्कृति और संदेश
प्रधानमंत्री मोदी की लाल किले वाली पोशाक में पगड़ी या साफा हमेशा चर्चा का विषय रहती है. 2014 में उन्होंने पहली बार चमकीली लाल जोधपुरी बंधेज पगड़ी पहनी थी, जिसमें हरे रंग की लंबी पूंछ थी. उसके बाद हर साल अलग-अलग शैली देखने को मिली.

कभी पीली और बहु-रंग वाली क्रिस-क्रॉस डिजाइन, कभी गुलाबी-पीली राजस्थानी साफा, कभी केसरिया रंग की सादा या पैटर्न वाली पगड़ी, कभी तिरंगे के रंगों वाली सफेद पगड़ी, कभी लहरिया प्रिंट और कभी बांधनी स्टाइल.
2026 में मोदी जी ने चमकीली लाल साफा पहना जिसमें पीले और सफेद बांधनी पैटर्न थे. इसे उन्होंने सफेद कुर्ता-पायजामा और भूरे रंग के नेहरू जैकेट के साथ पहना. ये पगड़ियां ज्यादातर राजस्थान और पश्चिमी भारत की पारंपरिक शैलियों से प्रेरित होती हैं.
बंधेज, लहरिया और जोधपुरी स्टाइल भारतीय हस्तशिल्प की समृद्धि को दिखाती हैं. कई बार रंग और डिजाइन राजनीतिक या सांस्कृतिक संदेश भी देते हैं. जैसे तिरंगे वाली पगड़ी हर घर तिरंगा अभियान से जुड़ी थी या केसरिया रंग बलिदान और साहस का प्रतीक माना जाता है.
यह परंपरा सिर्फ फैशन नहीं है. यह भारत की सांस्कृतिक विविधता को लाल किले जैसे राष्ट्रीय मंच पर पेश करने का तरीका है. 13 साल में अलग-अलग पगड़ियां पहनकर पीएम मोदी ने दिखाया कि नेतृत्व पारंपरिक जड़ों से जुड़ा रह सकता है. आधुनिक संदेश भी दे सकता है. हर साल लोग न सिर्फ भाषण का इंतजार करते हैं बल्कि यह भी देखते हैं कि इस बार कैसी पगड़ी होगी.
निरंतरता, प्रतीकवाद और राष्ट्र निर्माण
पीएम मोदी का 13 बार झंडा फहराना राजनीतिक स्थिरता और निरंतरता का संकेत है. स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम सिर्फ औपचारिकता नहीं रह गया है. इसमें युवा शक्ति, विकसित भारत 2047 और सांस्कृतिक गौरव को जोड़कर इसे भविष्य की दिशा से जोड़ा गया है.
वंदे मातरम का पहली बार समावेश राष्ट्रीय गीत को और अधिक सम्मान देने वाला कदम है. पगड़ियों की विविधता बताती है कि नेतृत्व कैसे क्षेत्रीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बना सकता है.
कुल मिलाकर 15 अगस्त 2026 का दिन इतिहास में दर्ज हो गया. तिरंगा लहराया, वंदे मातरम गूंजा और पीएम मोदी की 13वीं पगड़ी ने एक बार फिर ध्यान खींचा. यह समारोह देश की एकता, गौरव और आगे बढ़ने की इच्छा को मजबूत करता है.
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