नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के 2014 में पहली बार लालकिले की प्राचीर (Red Fort ramparts) से स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करने से पहले सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया गया था। पूर्व रक्षा सचिव आरके माथुर (RK Mathur) के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने अपने सामने लगाए जाने वाले बुलेटप्रूफ ग्लास को हटाने की मांग की थी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि अगर बुलेटप्रूफ बैरियर नहीं हटाया गया तो वह भाषण नहीं देंगे।
इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों के साथ चर्चा हुई और रात करीब दो बजे बुलेटप्रूफ शीशा हटाने का फैसला लिया गया। इसके बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लालकिले की प्राचीर से बिना बुलेटप्रूफ ग्लास के ही स्वतंत्रता दिवस का संबोधन करते आ रहे हैं।
एक रिपोर्ट मुताबिक, आरके माथुर ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले तत्कालीन इंटेलिजेंस ब्यूरो निदेशक ने प्रधानमंत्री मोदी को सुरक्षा इंतजामों की पूरी जानकारी दी थी। इसी दौरान प्रधानमंत्री के सामने लगाए जाने वाले बुलेटप्रूफ बैरियर का भी जिक्र हुआ।
प्रधानमंत्री ने इस पर कहा कि अगर उनके सामने बुलेटप्रूफ ग्लास लगा रहेगा तो वह देशवासियों को उस तरह संबोधित नहीं कर पाएंगे, जैसा वह चाहते हैं।
आरके माथुर के अनुसार, सुरक्षा अधिकारियों को शुरुआत में बुलेटप्रूफ ग्लास हटाने का फैसला उचित नहीं लगा। उनका तर्क था कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिहाज से यह बैरियर महत्वपूर्ण था।
लालकिला दिल्ली के बेहद व्यस्त इलाके में स्थित है और उसकी प्राचीर से सामने का बड़ा इलाका दिखाई देता है। सामने घनी इमारतें भी हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि बुलेटप्रूफ सुरक्षा कवच हटने से प्रधानमंत्री की सुरक्षा चुनौती बढ़ सकती है।
अधिकारियों ने प्रधानमंत्री से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का अनुरोध भी किया। लेकिन प्रधानमंत्री अपने फैसले पर कायम रहे।
माथुर के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया था कि अगर बुलेटप्रूफ बैरियर नहीं हटाया गया तो वह भाषण नहीं देंगे।
इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों को प्रोटोकॉल में बदलाव करना पड़ा। आरके माथुर ने बताया कि उन्होंने और आईबी प्रमुख ने मिलकर रात में ही इस संबंध में फैसला किया और करीब दो बजे बुलेटप्रूफ शीशा हटा दिया गया।
2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लालकिले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बिना बुलेटप्रूफ ग्लास के ही देश को संबोधित करते हैं।
लालकिले से स्वतंत्रता दिवस का संबोधन पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री अक्सर वहां मौजूद बच्चों और एनसीसी कैडेट्स के बीच भी पहुंचते हैं। इस दौरान बच्चों को प्रधानमंत्री से करीब से मिलने और बातचीत करने का मौका मिलता है।
ऐसे ही एक मौके पर एक बच्ची ने प्रधानमंत्री के पैर छूने की कोशिश की। इसी दौरान उसके सिर से टोपी नीचे गिर गई। प्रधानमंत्री ने तुरंत टोपी उठाई और बच्ची के सिर पर वापस रख दी। इस दौरान आसपास मौजूद बच्चों ने तालियां बजाईं।
प्रधानमंत्री के भाषण के साथ ही स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से जुड़ा यह अनौपचारिक और मानवीय पल भी हर साल लोगों के बीच चर्चा का विषय बनता है।
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