
नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम (winter season) भले ही अभी दूर हो, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों (Meteorologists) ने इस बार ठंड के सामान्य से कम रहने की संभावना को लेकर चिंता जताई है। इसकी बड़ी वजह तेजी से मजबूत होता अल-नीनो (El Niño) है। मौसम एजेंसियों के अनुसार, प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 1 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ऊपर पहुंच चुका है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर अल-नीनो आने वाले समय में और मजबूत हुआ तो 2026-27 की सर्दियों में भारत के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। इसका असर केवल सर्दियों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। मार्च से मई 2027 के बीच गर्मी भी ज्यादा तीखी पड़ सकती है।
अल-नीनो एक ऐसी मौसमी स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के तापमान, बारिश और मौसमी गतिविधियों पर पड़ता है।
भारत के लिए अल-नीनो खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका असर मॉनसून और बारिश के पैटर्न पर पड़ सकता है। इस बार चिंता इसलिए भी अधिक है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के चलते वैश्विक तापमान पहले से ही ऊंचे स्तर पर है।
अल-नीनो का मतलब यह नहीं है कि देश के हर शहर का तापमान किसी तय संख्या में बढ़ जाएगा। किसी जगह का तापमान समुद्री परिस्थितियों के अलावा ठंडी हवाओं, बादलों और दूसरे मौसम सिस्टम से भी प्रभावित होता है।
मसलन, अगर किसी शहर में सर्दियों के दौरान सामान्य तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रहता है और मौसम सामान्य से 2 डिग्री गर्म रहता है, तो तापमान करीब 12 डिग्री तक पहुंच सकता है। इसी तरह किसी जगह सामान्य तापमान -3 डिग्री है तो वह करीब -1 डिग्री तक जा सकता है। ये केवल उदाहरण हैं, किसी शहर के लिए वास्तविक पूर्वानुमान नहीं।
फिलहाल दिल्ली, चूरू, पटना, श्रीनगर या लद्दाख जैसे शहरों में तापमान कितने डिग्री तक बढ़ेगा, इसका सटीक अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
मैदानी इलाकों में अल-नीनो का असर तापमान के सामान्य से ऊपर रहने के रूप में दिखाई दे सकता है। दिल्ली और पटना में रातें सामान्य से ज्यादा गर्म रह सकती हैं, जिससे ठंड की तीव्रता कम महसूस हो सकती है।
राजस्थान के चूरू जैसे इलाकों में भी कुछ रातें सामान्य से कम ठंडी रह सकती हैं। हालांकि, स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
कश्मीर के श्रीनगर और लद्दाख जैसे बेहद ठंडे इलाकों में भी तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इन क्षेत्रों में वास्तविक स्थिति का अनुमान लगाना अभी मुश्किल है।
खासकर लद्दाख में ऊंचाई और भौगोलिक स्थिति के अनुसार तापमान में काफी अंतर होता है। इसलिए अभी किसी एक निश्चित तापमान की भविष्यवाणी करना उचित नहीं होगा।
अल-नीनो का असर सर्दियों के बाद भी जारी रह सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, मार्च से मई 2027 के बीच तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है। इसके चलते कई इलाकों में गर्मी और लू का असर बढ़ने की आशंका है।
इसके साथ ही मजबूत अल-नीनो भारत के मॉनसून को कमजोर कर सकता है। बारिश कम या असमान होने पर जल संकट और कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है। तापमान ज्यादा रहने की स्थिति में लू का खतरा भी बढ़ सकता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अल-नीनो के और मजबूत होने की संभावना बनी हुई है और इसका प्रभाव अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच अधिक स्पष्ट हो सकता है। इसके बाद 2027 में इसके धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की संभावना है।
हालांकि भारत में इसका वास्तविक असर कितना और किस क्षेत्र में होगा, यह आने वाले महीनों में सामने आने वाले मौसम के आंकड़ों से ही स्पष्ट होगा। फिलहाल संकेत यही हैं कि इस बार सर्दी और उसके बाद की गर्मी, दोनों सामान्य से अलग रह सकती हैं।
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