
नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के राष्ट्रीय प्रवक्ता (National Spokesperson) रहे शहजाद पूनावाला (Shehzad Poonawalla) ने पार्टी से इस्तीफा देने के बाद अपने फैसले की वजह स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा है कि प्रवक्ता का पद स्वैच्छिक (Voluntary) होता है और इसके लिए कोई वेतन नहीं मिलता। पूनावाला के मुताबिक, राजनीति और कामकाजी जीवन (Working Life) के बीच संतुलन बनाने के दौरान पैदा हुई आर्थिक परिस्थितियों (Financial Circumstances) को देखते हुए उन्होंने दोबारा अपनी पुरानी नौकरी में लौटने का निर्णय लिया है।
एक इंटरव्यू में पूनावाला ने बताया कि वह वर्ष 2024 से ही राजनीति छोड़ने की योजना बना रहे थे। उनका कहना है कि राजनीति में सक्रिय रहने के लिए उन्होंने पहले अपनी सर्विस इंडस्ट्री की नौकरी छोड़ दी थी और अपना पूरा समय राजनीतिक गतिविधियों को दिया। लेकिन बाद में उन्हें लगा कि अब उन्हें नौकरी और राजनीति में से किसी एक को चुनना होगा। इसके बाद उन्होंने वापस नौकरी करने का फैसला किया।
पूनावाला ने कहा कि उन्होंने अपने निर्णय को लेकर पार्टी नेतृत्व से बातचीत की थी। नेतृत्व की ओर से उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा गया, लेकिन लंबे विचार-विमर्श के बाद भी उन्होंने अपना निर्णय नहीं बदला। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने फैसले पर कायम हैं और इसे बदलने का उनका कोई इरादा नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों में प्रवक्ता का पद वेतन वाला पद नहीं होता। उनके अनुसार, यह एक स्वैच्छिक जिम्मेदारी है। इसलिए लंबे समय तक राजनीति को पूरा समय देने के बाद आर्थिक और पेशेवर जरूरतों को देखते हुए उन्होंने अपने करियर की दिशा बदलने का फैसला किया है।
भाजपा से अलग होने के बावजूद पूनावाला ने पार्टी की विचारधारा के प्रति अपना रुख स्पष्ट रखा है। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के लिए सीधे तौर पर काम नहीं करेंगे, लेकिन पार्टी की सोच और विचारधारा का समर्थन करते रहेंगे। उनका दावा है कि भाजपा ने उन्हें अपनी बात रखने की स्वतंत्रता दी और किसी मुद्दे पर असहमति होने पर पार्टी की ओर से चर्चा का अवसर भी मिला।
पूनावाला ने युवाओं, मध्यम वर्ग और राजनीति में आने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए भाजपा को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मंच बताया। हालांकि उन्होंने सक्रिय पार्टी भूमिका से खुद को अलग करने का फैसला किया है।
अपने भविष्य के कदमों को लेकर भी पूनावाला ने संकेत दिए हैं। भाजपा से इस्तीफे की घोषणा से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर द मेनिफेस्टो नामक नए पहल की जानकारी दी थी। इस पहल के जरिए मध्यम वर्ग से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है। उन्होंने कर व्यवस्था, जीवन स्तर और मध्यम वर्ग की आर्थिक चुनौतियों को लेकर सवाल उठाए हैं।
पूनावाला ने बताया कि उन्होंने 30 जुलाई को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अपना इस्तीफा सौंपा था। इस्तीफे में उन्होंने व्यक्तिगत और आर्थिक परिस्थितियों को अपने निर्णय की वजह बताया था। पार्टी नेतृत्व ने उनसे फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने अंततः अपने निर्णय को अंतिम बनाए रखा।
शहजाद पूनावाला दिसंबर 2017 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर भाजपा का पक्ष रखा। अब पार्टी की सक्रिय सदस्यता और प्रवक्ता पद से अलग होने के बाद उनके सामने पेशेवर जीवन और मध्यम वर्ग से जुड़े नए सार्वजनिक अभियान पर आगे बढ़ने का रास्ता है।
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