
- कम से कम नुकसान वाले वैकल्पिक रास्ते का करें उपयोग
नागदा। दिल्ली-मुंबई रेल कॉरिडोर हाल ही में हुए सर्वे को लेकर नागदा जनहित समिति ने आंदोलन का रुख ले लिया है। राज्यपाल से मुलाकात के बाद मंगलवार को नागदा जनहित समिति सहित प्रभावितों द्वारा रेल मंत्री के नाम तहसीलदार मधु नायक को ज्ञापन सौंपा गया। नवीन सर्वे से प्रभावितों ने नागदा जनहित समिति के माध्यम से वर्तमान सर्वे मार्ग की पुन: समीक्षा कर कम से कम नुकसान वाले वैकल्पिक मार्ग का चयन करने की मांग की।
जनहित समिति के ज्ञापन का वाचन कमल नयन जैन ने किया। जिसमें बताया कि नवीन कृषि उपज मंडी की ओर पहले गेट से रतन्याखेड़ी रोड, बेरछा रोड, जूना नागदा एवं गिंदवानिया होते हुए स्टेट हाईवे-17 स्थित गुरुकृपा ढाबे के समीप तक नए सर्वे निशान लगाए गए हैं। प्रस्तावित नए सर्वे मार्ग से बड़ी संख्या में छोटे एवं सीमांत किसान प्रभावित होने की आशंका है। कई किसानों के पास महज 2 से 4 बीघा कृषि भूमि है, जो उनकी आजीविका का मुख्य आधार है। ऐसे में जमीन का हिस्सा रेल परियोजना में जाने पर किसानों की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ परिवार के भरण-पोषण पर भी संकट खड़ा हो सकता है। कई मकान, प्लांट और ईंट भट्टे भी जद में आ रहे है। नागदा ईंट भट्टा व्यापारी संघ ने भी ज्ञापन सौप सभी सर्वे का विरोध किया। संघ ने कहा कि शहर में रेलवे के पास पहले से जमीन उपलब्ध है, इसलिए तीसरी और चौथी रेल लाइन उसी भूमि से निकाली जाए, ताकि किसानों और इँंट भ_ा व्यवसाय को नुकसान से बचाया जा सके। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी कि रेलवे द्वारा आगे भी कोई नया सर्वे कराया जाता है और उसमें ईंट भट्टा संचालकों के हित प्रभावित होते हैं, तो उसका भी विरोध किया जाएगा। ज्ञापन का वाचन मोतीलाल प्रजापत ने किया। ज्ञापन सौपते समय मनोज राठी बारदान वाला, बसंत मालपानी, भवानी सिंह देवड़ा, श्याम प्रजापत, दिलीप कांठेड़, मोतीसिंह शेखावत, लखन गुर्जर, रवि पाटीदार, मनीष कांठेड़, अक्षत जैन, राजेंद्र सिंह रघुवंशी, दौलतराम प्रजापत, मनोहरलाल प्रजापत, इक्का सेठ, पंकज प्रजापत, विनोद प्रजापत, महेश प्रजापत, सुरेश पटेल, केसर सिंह, राहुल सेन, कुलदीप प्रजापत, गोपाल चौधरी, रतनलाल, राजू, लाखन सिंह, यंकवेशसिंह रघुवंशी, गौमित रघुवंशी, लक्ष्य रघुवंशी, चैन सिंह रघुवंशी आदि मौजूद थे।