
भोपाल। मध्यप्रदेश में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के संचालन को लेकर परिवहन विभाग की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। ओला और उबर के एग्रीगेटर लाइसेंस की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित बताई जा रही है, इसके बावजूद दोनों कंपनियों के प्लेटफॉर्म पर टैक्सी बुकिंग और संचालन जारी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लाइसेंस प्रक्रिया पूरी हुए बिना कंपनियां किस आधार पर प्रदेश में सेवाएं संचालित कर रही हैं।
जानकारी के मुताबिक, ओला और उबर को मध्यप्रदेश में एग्रीगेटर के रूप में काम करने के लिए वर्ष 2019 में लाइसेंस जारी किए गए थे। बाद में लाइसेंस से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाएं और औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण इनके लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हो सका। पिछले करीब एक साल से लाइसेंस की स्थिति लंबित या होल्ड बताई जा रही है। इसके बावजूद दोनों कंपनियों के माध्यम से अनुबंधित टैक्सियां प्रदेश के अलग-अलग शहरों में चल रही हैं। आरोप है कि कंपनियों की ओर से अनुबंधित वाहनों से जुड़ी पूरी जानकारी विभाग के साथ साझा नहीं की जा रही है। इसके अलावा यात्रियों की शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई से संबंधित जानकारी भी विभाग को उपलब्ध कराने को लेकर सवाल हैं।
ओला-उबर जैसी ऐप आधारित सेवाओं का इस्तेमाल रोजाना बड़ी संख्या में यात्री करते हैं। ऐसे में ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन, वाहन की फिटनेस, परमिट, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच बेहद अहम हो जाती है। लाइसेंस की प्रक्रिया लंबित होने के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि प्लेटफॉर्म से जुड़ी टैक्सियों की नियमित जांच और निगरानी किस स्तर पर की जा रही है। यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है, यह भी स्पष्ट होना जरूरी है।
परिवहन विभाग के डिप्टी कमिश्नर किरण शर्मा ने बताया कि ओला और उबर ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। आवेदन में जो कमियां सामने आई हैं, उन्हें पूरा कराने की प्रक्रिया चल रही है। कमियां दूर होने के बाद लाइसेंस के नवीनीकरण करने की कार्रवाई संबंधित आरटीओ की तरफ से की जा रही हैं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved