वॉशिंगटन। इजरायल और तुर्की (Israel and Türkiye) के बीच सीरिया (Syria) को लेकर बढ़ता तनाव अब एक संभावित सैन्य टकराव (Syria) की आशंका तक पहुंचता दिख रहा है। इसी बीच इजरायल के दक्षिणपंथी अखबार ‘इजरायल हायोम’ (Military confrontation) में प्रकाशित एक लेख में दावा किया गया है कि अगर तुर्की की सेना सीरिया में तैनात होती है और इजरायल वहां तुर्की के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता है, तो NATO के आर्टिकल-5 की सुरक्षा अपने आप लागू नहीं होगी।
हालांकि, यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि यह इजरायल सरकार की आधिकारिक नीति नहीं, बल्कि अखबार में प्रकाशित एक राय/विश्लेषण है। NATO किसी सदस्य देश पर हमले की स्थिति में किस तरह प्रतिक्रिया देगा, यह परिस्थितियों और सदस्य देशों के सामूहिक फैसले पर निर्भर करता है।
लेख में NATO के सामूहिक रक्षा प्रावधान यानी आर्टिकल-5 का हवाला देते हुए तर्क दिया गया है कि इसकी मूल भावना सदस्य देशों के अपने क्षेत्र की रक्षा से जुड़ी है। ऐसे में अगर तुर्की की सेना सीरिया में तैनात होती है, तो सीरिया की जमीन को तुर्की का संप्रभु क्षेत्र नहीं माना जाएगा।
इसी आधार पर लेख में दावा किया गया है कि यदि इजरायल सीरिया में मौजूद तुर्की सैनिकों या उसके सैन्य ढांचे को निशाना बनाता है, तो इसे सीधे तुर्की की जमीन पर हमला नहीं माना जा सकता। इसलिए केवल तुर्की के NATO सदस्य होने के आधार पर आर्टिकल-5 के तहत सामूहिक सैन्य प्रतिक्रिया की गारंटी नहीं होगी।
हालांकि, आर्टिकल-5 की व्याख्या इतनी सीधी नहीं है और किसी खास हमले के बाद NATO की प्रतिक्रिया राजनीतिक और कानूनी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
सीरिया इस समय दोनों देशों के बीच संभावित टकराव का सबसे बड़ा क्षेत्र बनता जा रहा है। इजरायल को आशंका है कि तुर्की सीरिया में अपना सैन्य प्रभाव बढ़ा रहा है और सीरियाई सेना को प्रशिक्षण देने के साथ उसके सैन्य ढांचे को मजबूत करने में मदद कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में तुर्की की सैन्य टीमों ने T4, पलमायरा और हमा जैसे सैन्य ठिकानों का निरीक्षण किया था। इससे इजरायल की चिंता और बढ़ी।
इसी बीच उत्तरी सीरिया में इजरायल ने एक पुराने एयरबेस को निशाना बनाकर हवाई हमला किया। इजरायल को आशंका थी कि इस एयरबेस पर तुर्की की सेना तैनात हो सकती है। हालांकि, सीरियाई अधिकारियों के अनुसार वहां तुर्की सैनिकों की तैनाती नहीं थी और एक तकनीकी टीम केवल रनवे तथा कंट्रोल टावर की मरम्मत के लिए गई थी।
इजरायल और तुर्की के बीच बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका भी सतर्क है। अमेरिका के तुर्की में राजदूत और सीरिया मामलों के विशेष दूत टॉम बैरक ने इजरायल के हमले को तनाव बढ़ाने वाला अनावश्यक कदम बताया।
उन्होंने संकेत दिया कि इजरायल, तुर्की और सीरिया के बीच ऐसा तंत्र विकसित करने की जरूरत है, जिससे भविष्य में गलतफहमी के कारण सैन्य टकराव की स्थिति पैदा न हो।
फिलहाल इजरायल और तुर्की के बीच सीधी सैन्य जंग नहीं हुई है। लेकिन सीरिया में दोनों देशों की बढ़ती सैन्य सक्रियता ने टकराव का खतरा जरूर बढ़ाया है।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि अगर सीरिया में इजरायल और तुर्की की सेनाएं आमने-सामने आती हैं, तो NATO आर्टिकल-5 को किस तरह लागू करेगा? फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक फैसला या ऐसी स्थिति में NATO की निश्चित प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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