वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन को नई सरकारी ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ (‘Super Intelligence Force’) का प्रमुख नियुक्त किया है। ट्रंप प्रशासन ने इस नई टास्क फोर्स का गठन ऐसे समय किया है, जब एक तरफ एआई को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है, वहीं दूसरी तरफ शोधकर्ता इस तकनीक के संभावित सुरक्षा जोखिमों को लेकर चेतावनी दे रहे हैं।
ट्रंप एआई के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी के अनुरूप नई टास्क फोर्स का नाम ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ (SIF) रखा गया है। ट्रंप ने कहा कि इसका उद्देश्य संघीय सरकार के प्रयासों में तालमेल स्थापित करना और यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका सुपर इंटेलिजेंस के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करता रहे। उन्होंने इस तकनीक को औद्योगिक क्रांति और इंटरनेट से भी बड़ा बदलाव बताया है।
नई फोर्स केवल एआई के विकास को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं रहेगी। रिपोर्टों के मुताबिक, टास्क फोर्स को 120 दिनों के भीतर एआई से जुड़े जोखिमों और अवसरों का व्यापक आकलन करने वाली रिपोर्ट तैयार करनी है। इसमें मौजूदा कानूनों, सरकारी भूमिका और एआई से पैदा होने वाले संभावित खतरों से निपटने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा।
ट्रंप के मुताबिक, यह समूह उपभोक्ताओं, जनहित संगठनों, धार्मिक संगठनों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा संचालकों और एआई कंपनियों के साथ भी समन्वय करेगा। टास्क फोर्स सीधे ट्रंप और व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स को रिपोर्ट करेगी।
जे क्लेटन के अलावा फोर्स में फेडरल ट्रेड कमीशन के चेयरमैन एंड्रयू फर्ग्यूसन, पेंटागन के अंडरसेक्रेटरी फॉर रिसर्च एंड इंजीनियरिंग एमिल माइकल और ऑफिस ऑफ पर्सनेल मैनेजमेंट के निदेशक स्कॉट कुपोर भी प्रमुख भूमिका में होंगे।
क्लेटन इस अनौपचारिक ‘एआई सीजर’ भूमिका को संभालने वाले दूसरे व्यक्ति हैं। इससे पहले वेंचर कैपिटलिस्ट डेविड सैक्स के पास यह जिम्मेदारी थी। सैक्स और एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग ट्रंप को एआई से जुड़े मुद्दों पर सलाह देते रहे हैं।
जे क्लेटन लंबे समय तक वॉल स्ट्रीट के वकील रहे हैं। 2008 के वित्तीय संकट के दौरान उन्होंने बार्कलेज की ओर से गोल्डमैन सैक्स और लेहमैन ब्रदर्स की संपत्तियों की खरीद से जुड़े मामले को संभाला था। ट्रंप के पहले कार्यकाल में वह सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के चेयरमैन रहे।
क्लेटन अगस्त 2026 में अमेरिका के राष्ट्रीय खुफिया निदेशक बने। इससे पहले वह मैनहट्टन के संघीय अभियोजक के पद पर भी रहे थे। हालांकि, उनकी पेशेवर पृष्ठभूमि मुख्य रूप से कानून, वित्त और खुफिया प्रशासन से जुड़ी रही है, तकनीकी क्षेत्र में उनका कोई लंबा करियर नहीं रहा है।
क्लेटन ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से बातचीत में कहा है कि ट्रंप चाहते हैं कि चीन के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच अमेरिका एआई के क्षेत्र में सबसे आगे रहे। उनका कहना है कि एआई की दौड़ में पहले स्थान पर न रहने का जोखिम बहुत बड़ा है।
क्लेटन के मुताबिक, पीछे रहने से जाने और अनजाने दोनों तरह के खतरे बढ़ सकते हैं, खासकर विरोधी देशों की ओर से। उनका तर्क है कि अमेरिका यदि तकनीकी रूप से आगे रहता है तो वह अमेरिकी नागरिकों की ओर से इन जोखिमों को बेहतर ढंग से संभाल सकता है।
ट्रंप की यह पहल ऐसे समय हुई है जब एआई की क्षमताओं और उसके संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ रही है। हाल के मामलों में उन्नत एआई सिस्टम द्वारा गलतियां करने और कुछ बाहरी वेबसाइटों या डिजिटल संपत्तियों को प्रभावित करने जैसी घटनाओं ने सुरक्षा पर बहस तेज की है। साथ ही एआई से रोजगार, साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन एआई पर अत्यधिक नियमन के बजाय नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्राथमिकता देने की बात करता रहा है। नई ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ के सामने अब चुनौती यही है कि अमेरिका को तकनीकी दौड़ में आगे रखते हुए एआई से जुड़े सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के जोखिमों से निपटने के लिए सरकार की भूमिका कैसे तय की जाए।
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