इस्लामाबाद! पाकिस्तान और तुर्किये (Pakistan and Türkiye) के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग के बीच रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस (Pakistan and Türkiye) पर तुर्किये वायुसेना (turkish air force) के सैन्य परिवहन विमान की आवाजाही सामने आई है। यह वही एयरबेस है, जिसे मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सैन्य कार्रवाई में निशाना बनाया गया था। ताजा गतिविधि ने पाकिस्तान-तुर्किये रक्षा सहयोग और संभावित सैन्य सप्लाई को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
एविएशन हिस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, तुर्किये वायुसेना का Airbus A400M Atlas विमान 18 अगस्त को नूर खान एयरबेस पहुंचा और बाद में वहां से रवाना हुआ। विमान का कॉलसाइन TUAF526 बताया गया है। हालांकि, विमान में क्या सामान था, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
रक्षा सूत्रों के हवाले से ऐसी आशंका जताई जा रही है कि तुर्किये की ओर से पाकिस्तान को ड्रोन, हथियार या अन्य सैन्य उपकरण मुहैया कराए जा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती कि 18 अगस्त को पहुंचे A400M विमान में वास्तव में किस तरह का सैन्य सामान था।
भारत की सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान में तुर्किये की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। खासकर इसलिए क्योंकि दोनों देशों के बीच ड्रोन और रक्षा तकनीक को लेकर सहयोग पहले से बढ़ रहा है।
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से तुर्किये मूल के Asisguard Songar और YIHA-III ड्रोन के इस्तेमाल की रिपोर्ट सामने आई थी। भारतीय कार्रवाई में इनमें से कुछ ड्रोन को नष्ट किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
इसके बाद पाकिस्तान और तुर्किये के रक्षा संबंधों पर भारत की नजर और बढ़ गई। पाकिस्तान चीन के अलावा तुर्किये के तेजी से विकसित हो रहे ड्रोन और रक्षा उद्योग से भी अपनी सैन्य क्षमता मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान की ड्रोन क्षमता को लेकर तुर्किये की कंपनी Baykar से उसके संपर्क भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू की तुर्किये में Baykar के चेयरमैन सेल्चुक बायराक्तार से मुलाकात भी हो चुकी है।
Baykar Bayraktar TB2, Akıncı और Kızılelma जैसे मानवरहित युद्धक सिस्टम विकसित करती है। ऐसे में नूर खान एयरबेस पर A400M की आवाजाही को पाकिस्तान की बढ़ती ड्रोन और सैन्य क्षमताओं के संदर्भ में देखा जा रहा है।
पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच हुए हालिया मक्का रक्षा समझौते ने भी इस घटनाक्रम को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है। समझौते के तहत एक देश पर हमला तीनों देशों के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देखा जाएगा।
ऐसे में पाकिस्तान में तुर्किये की किसी भी नई सैन्य गतिविधि को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बारीकी से देखा जा रहा है। हालांकि, सोशल मीडिया पर चीनी सैन्य विमानों के भी पाकिस्तान के नूर खान और मसरूर एयरबेस पहुंचने के दावे किए गए हैं, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नूर खान एयरबेस पर तुर्किये के सैन्य परिवहन विमान की मौजूदगी ऐसे समय सामने आई है, जब भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के बाद दोनों देशों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि पाकिस्तान को तुर्किये से बड़े पैमाने पर ड्रोन या अन्य सैन्य तकनीक मिलती है, तो इससे उसकी मानवरहित युद्ध क्षमता मजबूत हो सकती है।
हालांकि, एक विमान की आवाजाही को सीधे सैन्य हथियारों की सप्लाई का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। विमान के कार्गो और मिशन की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।
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