बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर (Bilaspur, Chhattisgarh) जिले स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) में सोमवार को दर्दनाक हादसा हो गया। शावकों के साथ घूम रही बाघिन के करीब पहुंचना चार युवकों के लिए जानलेवा साबित हुआ। बाघिन ने युवकों पर हमला कर दिया, जिसमें 25 वर्षीय धरमलाल धृतलहरे की मौत हो गई। तीन अन्य युवक किसी तरह भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।
वन विभाग के मुताबिक, मृतक लोरमी क्षेत्र के बांधा गांव का रहने वाला था। घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
शावकों के पास पहुंचते ही बाघिन हुई आक्रामक
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना सोमवार सुबह करीब 11 बजे की है। धरमलाल तीन अन्य युवकों के साथ जंगल के भीतर गया था। इसी दौरान चारों की नजर शावकों के साथ मौजूद बाघिन पर पड़ी और वे उसके काफी करीब पहुंच गए।
शावकों के आसपास इंसानों की मौजूदगी को खतरा मानकर बाघिन आक्रामक हो गई और उसने युवकों पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से मौके पर भगदड़ मच गई। तीन युवक किसी तरह वहां से भाग निकले, लेकिन धरमलाल बाघिन की चपेट में आ गया। हमले में उसकी मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि हादसे वाले क्षेत्र में इन दिनों झुमरी, आशा और गंगा नाम की तीन बाघिनें अपने शावकों के साथ विचरण कर रही हैं। इलाके में एक नर बाघ की आवाजाही की भी जानकारी है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मादा बाघिन अपने शावकों को लेकर बेहद सतर्क रहती है। उसे बच्चों के आसपास किसी इंसान या अन्य संभावित खतरे का एहसास होने पर वह अचानक आक्रामक हो सकती है।
टाइगर रिजर्व बंद था, फिर युवक जंगल में कैसे पहुंचे?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि बारिश के मौसम में पर्यटकों के लिए बंद अचानकमार टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित इलाके में चारों युवक कैसे पहुंच गए।
शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि युवक बांस या लकड़ी लेने के लिए जंगल में गए थे। हालांकि, वे किस रास्ते से अंदर दाखिल हुए और प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने की वास्तविक वजह क्या थी, इसका पता अभी जांच के बाद ही चलेगा।
वन विभाग की टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि चारों युवकों ने जंगल में प्रवेश के लिए किस मार्ग का इस्तेमाल किया था।
बाघिन के हमले में युवक की मौत की खबर फैलने के बाद जंगल से लगे गांवों में चिंता और दहशत का माहौल है। वन विभाग ने ग्रामीणों से प्रतिबंधित जंगल में प्रवेश नहीं करने की अपील की है।
शावकों के साथ बाघिनों की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की जंगल में आवाजाही रोककर उन्हें बाघों के व्यवहार और संभावित खतरे के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है।
फिलहाल वन विभाग घटना की परिस्थितियों की जांच कर रहा है और यह पता लगाने में जुटा है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में चारों युवक किस तरह पहुंचे थे।
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