
नई दिल्ली। नेपाल (Nepal) में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ (flood) ने उत्तरी इलाकों में भारी तबाही मचाई है। कई जगह घर और बस्तियां पूरी तरह बह गईं, जबकि बड़ी संख्या में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। त्रिशूली नदी (Trishuli River) में अचानक आए तेज बहाव और मलबे की लहर ने 35 मोटरेबल ब्रिज और 45 सस्पेंशन ब्रिज (Suspension bridge) को तबाह कर दिया। करीब 40 किलोमीटर सड़क भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
नेपाल के उत्तरी हिस्से में जहां पर्यटन और स्थानीय बस्तियों के कारण चहल-पहल रहती थी, वहां अब तबाही का मंजर है। कई घर पूरी तरह बह गए, जबकि कुछ इलाके मलबे में तब्दील हो गए हैं। इस आपदा के बीच राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
त्रिशूली नदी में आया मलबे के साथ तेज सैलाब
तिब्बत से निकलकर नेपाल पहुंचने वाली त्रिशूली नदी तेज बहाव और व्हाइट वाटर राफ्टिंग के लिए जानी जाती है। लेकिन 26 अगस्त को इसी नदी में अचानक पानी और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि मजबूत कंक्रीट के पुल भी इसकी चपेट में आ गए।
बाढ़ की तेज लहर अपने साथ भारी मात्रा में मलबा लेकर आई। इसके कारण 35 मोटरेबल ब्रिज और 45 सस्पेंशन ब्रिज नष्ट हो गए। करीब 40 किलोमीटर सड़क को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
1,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता
नेपाल में इस प्राकृतिक आपदा से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि 1,500 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं, 290 भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पाने की जानकारी सामने आई है। उनकी तलाश के लिए प्रयास जारी हैं।
पहले भूकंप और GLOF पर था शक
अचानक आई बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआती तौर पर कई तरह के अनुमान लगाए गए थे। कहीं इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया तो कहीं ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF की आशंका जताई गई।
हालांकि, बाद में सैटेलाइट तस्वीरों और भूकंपीय आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लिरुंग ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिरा था। इसके बाद पानी और मलबे की तेज लहर ने त्रिशूली नदी के बहाव को बेहद खतरनाक बना दिया और निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों को बहाल करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved