
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (State Tiger Strike Force-STSF) को बड़ी सफलता मिली है. 10 तेंदुओं के अवैध शिकार (Poaching 10 leopards), उनकी खाल और अंगों की तस्करी के मामले में एसटीएसएफ ने एक और आरोपी को मुरैना से गिरफ्तार किया है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक हरियाणा, मध्यप्रदेश और दिल्ली से कुल 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बयानों के आधार पर STSF ने कार्रवाई करते हुए 26 अगस्त 2026 को मुरैना निवासी सुखदेव को गिरफ्तार किया. आरोपी को शिवपुरी स्थित विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है।
यह पूरा मामला मध्यप्रदेश शासन और वन विभाग के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि गिरोह द्वारा श्योपुर और मुरैना जिलों में 10 तेंदुओं का शिकार किए जाने के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं. यह संपूर्ण क्षेत्र ‘चीता लैंडस्केप’ के तहत आता है।
आगरा में 10 खालों की बरामदगी से शुरू हुई थी कड़ी
इस संगठित नेटवर्क का खुलासा 23 जुलाई 2026 को हुआ था, जब उत्तर प्रदेश के आगरा में 10 तेंदुओं की खाल के साथ तस्करों को पकड़ा गया था. मामले के तार मध्यप्रदेश से जुड़े पाए जाने पर एमपी एसटीएसएफ और स्थानीय वन अमले की संयुक्त टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शुरुआती 7 शिकारियों को गिरफ्तार किया था.
गिरोह के 8वें सदस्य के रूप में ग्राम हासई (मुरैना) निवासी मन्नू नाथ के पुत्र को गिरफ्तार किया गया, जिसकी निशानदेही पर मुरैना के बीहड़ों में गाड़कर रखा गया तेंदुए का कंकाल बरामद हुआ.
दिल्ली से वाइल्डलाइफ SOS कर्मी गिरफ्तार
केंद्र सरकार के वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) और STSF की संयुक्त टीम ने 13 अगस्त 2026 को उत्तम नगर (नई दिल्ली) निवासी मुख्य आरोपी वसीम अकरम को अरेस्ट किया. चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी वसीम ‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ (Wildlife SOS) संस्था में कार्यरत था.
कूनो और चंबल अभयारण्य में किया गया था शिकार
पूछताछ और जांच में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने कुल 10 तेंदुओं का शिकार किया था, जिनमें 6 शिकार कूनो वन्यजीव वनमंडल, 2 शिकार श्योपुर वनमंडल और 2 शिकार चंबल अभयारण्य मुरैना वनमंडल से किए गए। STSF ने अब तक आरोपियों के पास से तेंदुए के अंग, कंकाल, 6 लेग होल्ड ट्रैप और 1 चाकू जब्त किया है।
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