श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर (J$K) में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से जुड़ी संपत्तियों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में सोपोर पुलिस ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद डूरू इलाके में बड़ी कार्रवाई की है। यहां जमात-ए-इस्लामी से कथित तौर पर जुड़ी दो दो-मंजिला इमारतों, छह दुकानों और दो कनाल जमीन को जब्त कर लिया गया है।
पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर ने डूरू स्थित इस्लामिया मॉडल स्कूल की संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी किया था। प्रशासन के मुताबिक स्कूल की दोनों इमारतें वर्ष 2022 से बंद थीं। आदेश के बाद सोपोर पुलिस ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में जब्ती की कार्रवाई पूरी की।
अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई प्रतिबंधित संगठन और उससे जुड़े नेटवर्क की संपत्तियों की पहचान तथा उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से जमात-ए-इस्लामी से जुड़ी संपत्तियों और कथित वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही हैं।
जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर को अलगाववादी गतिविधियों से जुड़ा संगठन माना जाता है और केंद्र सरकार ने इस पर कई बार प्रतिबंध लगाया है।
जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर पर बड़ी कार्रवाई पुलवामा आतंकी हमले के कुछ दिन बाद 28 फरवरी 2019 को हुई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने UAPA की धारा 3 के तहत संगठन को पांच साल के लिए ‘गैर-कानूनी संगठन’ घोषित किया था।
सरकार ने प्रतिबंध के पीछे संगठन के आतंकी संगठनों से कथित संबंध, उग्रवाद और आतंकवाद को समर्थन देने तथा देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने जैसे कारण बताए थे।
इसके बाद फरवरी 2024 में केंद्र सरकार ने प्रतिबंध को अगले पांच साल के लिए बढ़ा दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उस समय कहा था कि संगठन देश की सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ गतिविधियों में शामिल है। सरकार ने आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति दोहराई थी।
2019 में प्रतिबंध लगने के बाद से जांच एजेंसियों ने जमात-ए-इस्लामी से जुड़ी संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त या अटैच करने की कार्रवाई तेज की। राज्य जांच एजेंसी (SIA) और स्थानीय पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग जिलों में ऐसी संपत्तियों की पहचान की।
बताया गया है कि 2022 के अंत तक SIA करीब 188 संपत्तियों की पहचान कर चुकी थी। इसके बाद अलग-अलग चरणों में संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई हुई। उत्तरी कश्मीर में 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां और पुलवामा, कुलगाम, बडगाम तथा श्रीनगर में 122 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अन्य संपत्तियां कार्रवाई के दायरे में आईं।
अनंतनाग, शोपियां और दूसरे इलाकों में भी जमीन, व्यावसायिक इमारतों और स्कूलों से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
जमात-ए-इस्लामी से जुड़े शिक्षण संस्थान भी सुरक्षा एजेंसियों की जांच के दायरे में रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कई जिलों में JeI या उससे जुड़े संगठनों द्वारा संचालित स्कूलों पर कार्रवाई की गई या उन्हें बंद कराया गया।
कुछ मदरसों पर भी प्रतिबंधित संगठन से कथित संबंध और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के आरोपों के चलते UAPA के तहत कार्रवाई की गई। वहीं, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कथित टेरर फंडिंग नेटवर्क की जांच के दौरान जमात और उससे जुड़े ट्रस्टों से संबंधित कई ठिकानों पर छापेमारी की है।
डूरू स्थित इस्लामिया मॉडल स्कूल की संपत्ति पर हुई ताजा कार्रवाई भी इसी अभियान का हिस्सा है। प्रशासन के मुताबिक, 2022 से बंद पड़ी इन इमारतों और उनसे जुड़ी जमीन को औपचारिक रूप से जब्त करने का उद्देश्य प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ी संपत्तियों के संभावित गैर-कानूनी इस्तेमाल को रोकना है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस और प्रशासन का कहना है कि प्रतिबंधित संगठनों के वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर कार्रवाई जारी रहेगी। एजेंसियों का फोकस ऐसी संपत्तियों की पहचान करने पर है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर गैर-कानूनी गतिविधियों को समर्थन देने के लिए किया जा सकता है।
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