
नई दिल्ली । ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम (BRICS Chief Justice Forum) में भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) जस्टिस सूर्यकांत (Justice Suryakant) ने सदस्य और सहयोगी देशों के बीच न्यायिक सहयोग (Judicial Cooperation) को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए ऐसा कानूनी और न्यायिक वातावरण (Legal And Judicial Environment) जरूरी है, जिसमें कारोबारी विवादों का प्रभावी समाधान समय पर किया जा सके।
जस्टिस सूर्यकांत ने कमर्शियल विवादों के निपटारे के लिए मध्यस्थता और सुलह समझौते पर आधारित साझा मंच बनाने का प्रस्ताव रखा। उनका मानना है कि इस तरह की व्यवस्था अलग-अलग देशों में कारोबार करने वाले पक्षों के लिए विवाद समाधान की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद कर सकती है।
सीजेआई ने न्यायपालिका की भूमिका को केवल अदालतों में मामलों के निपटारे तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने न्यायिक सहयोग को देशों के आपसी संबंधों, व्यापारिक गतिविधियों और निवेश के अनुकूल माहौल से भी जोड़ा। अंतरराष्ट्रीय कारोबार में कानूनी स्पष्टता और विवादों के प्रभावी समाधान को निवेशकों के भरोसे के लिए अहम माना जाता है।
ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम का आयोजन शुक्रवार को किया गया। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों और सहयोगी देशों के मुख्य न्यायाधीशों, सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्षों तथा वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान न्यायिक सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
फोरम के पहले दिन जस्टिस सूर्यकांत ने कई देशों के न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। उन्होंने रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, बेलारूस, कजाकिस्तान, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात की।
इन बैठकों में देशों के बीच न्यायिक सहयोग बढ़ाने से जुड़े समझौतों और समझौता ज्ञापनों की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके साथ ही व्यापार और कॉरपोरेट विवादों के समाधान में मध्यस्थता तथा सुलह समझौते की भूमिका को लेकर भी विचार साझा किए गए।
द्विपक्षीय बातचीत में देशों के बीच व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने का मुद्दा भी प्रमुख रहा। विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए प्रभावी और कुशल कमर्शियल कोर्ट की आवश्यकता पर चर्चा की गई। कारोबारी मामलों में स्पष्ट और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया निवेश के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फोरम में न्यायिक फैसलों और आदेशों को अलग-अलग देशों में आपसी स्तर पर मान्यता देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। सीमा पार कारोबारी मामलों में ऐसी व्यवस्था न्यायिक प्रक्रियाओं के बीच समन्वय बढ़ाने में उपयोगी हो सकती है।
इसके अलावा न्यायिक अधिकारियों के बीच प्रोफेशनल एक्सचेंज कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के विकल्पों पर भी बातचीत हुई। इस संदर्भ में भोपाल स्थित नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी जैसे संस्थानों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर विचार किया गया। ऐसे कार्यक्रमों से विभिन्न देशों के न्यायिक अधिकारियों के बीच अनुभव और कार्यप्रणाली साझा करने का अवसर मिल सकता है।
ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और निवेश का दायरा बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय कारोबारी विवादों के समाधान की जरूरत भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। अलग-अलग देशों की कानूनी व्यवस्थाओं के कारण ऐसे मामलों में जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। मध्यस्थता और सुलह जैसे वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र इन चुनौतियों को कम करने में मददगार हो सकते हैं।
जस्टिस सूर्यकांत का साझा मंच बनाने का प्रस्ताव इसी व्यापक न्यायिक सहयोग की दिशा में रखा गया है। इसका उद्देश्य कारोबारी विवादों के समाधान को आसान बनाने के साथ ब्रिक्स देशों के बीच न्यायिक समन्वय और आपसी भरोसे को मजबूत करना है। सम्मेलन में हुई चर्चाओं से स्पष्ट हुआ कि व्यापारिक संबंधों के विस्तार के साथ न्यायिक सहयोग को भी समान महत्व दिया जा रहा है।
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