
नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल (West Bengal) के कई जिलों में घरों के भीतर आयोजित होने वाली प्रार्थना सभाओं (Prayer Meetings) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कथित हमलों (Attacks) और विरोध की घटनाओं के बाद ईसाई समूहों (Christian Groups) ने कुछ क्षेत्रों में घरेलू प्रार्थना सभाएं और लोगों से सामुदायिक मुलाकातें फिलहाल रोक दी हैं। समूहों का कहना है कि लगातार सामने आ रही घटनाओं से समुदाय के बीच सुरक्षा (Security) को लेकर चिंता बढ़ी है।
सबसे चर्चित मामला हावड़ा जिले के उलूबेरिया का है। 23 अगस्त को एक किराए के मकान में रविवार की प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी। पादरी मिथुन हाजरा के अनुसार, सभा में करीब 60 पुरुष और महिलाएं मौजूद थे। सुबह करीब 11 बजे प्रार्थना शुरू हुई थी और दोपहर करीब तीन बजे नारे लगाती हुई भीड़ के घर में पहुंचने का आरोप है।
हाजरा ने आरोप लगाया कि भीड़ ने उन्हें और वहां मौजूद अन्य लोगों को निशाना बनाया। उनके मुताबिक, मारपीट के साथ घर में मौजूद साउंड सिस्टम, पोडियम, मेज, कुर्सियां और पंखे भी तोड़ दिए गए। भीड़ की ओर से प्रार्थना सभा में जबरन धर्मांतरण किए जाने का आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई है।
घटना के बाद पुलिस ने पादरी और वहां मौजूद लोगों को बाहर निकाला तथा घायलों को अस्पताल पहुंचाया। उपचार के बाद पादरी की ओर से पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। हावड़ा ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक अमित वर्मा ने शिकायत मिलने और प्राथमिकी दर्ज किए जाने की पुष्टि की। उनके अनुसार मामले की जांच जारी है और उस समय तक किसी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं थी।
ईसाई समुदाय से जुड़े संगठनों के अनुसार, उलूबेरिया की घटना अकेली नहीं है। उनका दावा है कि अगस्त में हावड़ा, उत्तर 24 परगना, पूर्व बर्धमान और पूर्व मेदिनीपुर सहित कई इलाकों में प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद की घटनाएं सामने आईं। 30 अगस्त को हावड़ा के जगतबल्लवपुर और उत्तर 24 परगना के हिंगलगंज में भी घरेलू प्रार्थना सभाओं के दौरान घटनाओं की जानकारी दी गई।
25 अगस्त को हावड़ा के घुसुड़ी में एक घर में आयोजित प्रार्थना सभा को लेकर भी मारपीट की शिकायत सामने आई। चर्च से जुड़े फादर सूरज सरोज के अनुसार, समुदाय के कुछ लोगों के साथ मारपीट हुई और कई लोग घायल हुए। 26 अगस्त को पूर्व मेदिनीपुर के चेक माइलपोस्ट गांव में पादरी और उनकी पत्नी के साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया।
पूर्व बर्धमान जिले में 14 अगस्त को अंतिम संस्कार को लेकर भी विवाद हुआ। सेंट क्लेरेट चर्च से जुड़े पादरी सैमुअल हेम्ब्रम के अनुसार, भीड़ ने दफन स्थल से संबंधित दस्तावेज दिखाने की मांग की और अंतिम संस्कार रोक दिया। आरोप है कि शव को कब्र में उतारने के बाद उसे बाहर निकालना पड़ा और बाद में बर्धमान शहर के दूसरे कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार किया गया।
पुलिस ने इस घटना को स्थानीय विवाद और जमीन के इस्तेमाल से जोड़कर देखा है। पूर्व बर्धमान की पुलिस अधीक्षक पुष्पा के अनुसार, मृत महिला स्थानीय निवासी नहीं थी और लोगों ने जिस स्थान पर दफन किया जा रहा था, उसकी जमीन को लेकर आपत्ति जताई थी। पुलिस जमीन के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
जबरन धर्मांतरण के आरोपों पर राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को अपनी धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रार्थना करने का अधिकार है। हालांकि, यदि किसी मामले में जबरन धर्मांतरण की शिकायत सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। वाम दलों ने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की बात कही, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर भय का माहौल बनाने का आरोप लगाया। भाजपा के एक नेता ने इन घटनाओं की जानकारी होने से इनकार किया। फिलहाल विभिन्न मामलों में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही घटनाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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