
नई दिल्ली ।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation) ने ईओएस-05 (EOS-05) उपग्रह के सफल प्रक्षेपण के बाद अपने अगले महत्वपूर्ण मिशनों की तैयारी तेज कर दी है। इसरो प्रमुख वी नारायणन (V Narayanan) ने बताया कि इसी कैलेंडर वर्ष में देश के पहले मानवरहित गगनयान मिशन (Uncrewed Gaganyaan Mission) को लॉन्च करने के लिए व्यवस्थित तरीके से काम किया जा रहा है। इस मिशन को भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम (Human Spaceflight Programme) की दिशा में महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
ईओएस-05 को जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया गया। प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद रॉकेट ने उपग्रह को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित किया। यह कक्षा जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से करीब 5000 किलोमीटर नीचे है। इसके बाद उपग्रह अपनी निर्धारित अंतिम कक्षा तक पहुंचने के लिए आगे की प्रक्रिया खुद पूरी करेगा।
इस मिशन की एक खास उपलब्धि रॉकेट की अपेक्षा से अधिक ऊंचाई तक पहुंचना रही। जीएसएलवी-एफ17 को उपग्रह को 28,934 किलोमीटर के उच्चतम बिंदु तक पहुंचाना था, लेकिन उसने करीब 2,092 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय की। इसके परिणामस्वरूप उपग्रह लगभग 31,026 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया।
ईओएस-05 का वजन 2367 किलोग्राम बताया गया है। यह किसी जीएसएलवी रॉकेट द्वारा अब तक उठाया गया सबसे भारी पेलोड है। इस उपलब्धि से भारत की भारी उपग्रहों को ऊंची कक्षाओं तक पहुंचाने की क्षमता को मजबूती मिली है।
इसरो प्रमुख ने बताया कि गगनयान कार्यक्रम के पहले मानवरहित मिशन पर अंतरिक्ष एजेंसी उद्योग जगत और अन्य संबंधित संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है। इस मिशन का उद्देश्य मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान से पहले आवश्यक प्रणालियों और प्रक्रियाओं का परीक्षण करना है। इसके जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले मिशन की तैयारियों को परखा जाएगा।
इसरो के लिए ईओएस-05 मिशन की सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संगठन को पिछले कुछ वर्षों में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। अगस्त 2021 में जीएसएलवी-एफ10 और ईओएस-03 मिशन क्रायोजेनिक चरण में तकनीकी समस्या के कारण सफल नहीं हो सका था। इसके बाद जनवरी 2026 में पीएसएलवी-सी62 और ईओएस-एन1 मिशन में तीसरे चरण के अंत में नियंत्रण प्रणाली से जुड़ी खराबी सामने आई थी।
इन घटनाओं के बाद इसरो ने जांच के आधार पर जरूरी तकनीकी बदलाव किए। ईओएस-05 का सफल प्रक्षेपण उन सुधारों के प्रभावी होने का संकेत भी माना जा रहा है। इस सफलता के बाद इसरो का ध्यान अब आगे के निर्धारित मिशनों पर है।
वी नारायणन ने बताया कि वित्त वर्ष के दौरान छह और प्रक्षेपणों का लक्ष्य रखा गया है। इनमें नौवहन उपग्रह एनवीएस-03 का मिशन भी शामिल है। उन्होंने ईओएस-05 को जासूसी उपग्रह बताए जाने की बात को खारिज किया और इसे इमेजिंग क्षमता से जुड़े मिशन के रूप में स्पष्ट किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जीएसएलवी-एफ17 और ईओएस-05 की सफलता की सराहना की। उन्होंने इसे भारत की अंतरिक्ष क्षमता, तकनीकी दक्षता और नवाचार से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। ईओएस-05 की सफलता और गगनयान की प्रस्तावित मानवरहित उड़ान के साथ भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब एक साथ कई महत्वपूर्ण तकनीकी लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ रहा है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved