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गोरखपुर में 5.88 करोड़ की चरस बरामद, अमरनाथ एक्सप्रेस से दो महिलाओं समेत तीन तस्कर डीआरआई के हत्थे चढ़े

September 05, 2026

नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गोरखपुर रेलवे स्टेशन (Gorakhpur Railway Station) पर राजस्व खुफिया निदेशालय (Directorate Of Revenue Intelligence) की टीम ने मादक पदार्थों की तस्करी (Drug Trafficking) के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से कुल 5.88 किलोग्राम चरस (Charas) बरामद हुई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित कीमत करीब 5.88 करोड़ रुपये बताई गई है।

मामला अमरनाथ एक्सप्रेस से जुड़ा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार तीनों आरोपी बिहार के सुगौली से ट्रेन में सवार हुए थे और उनका कथित गंतव्य पंजाब का लुधियाना था। डीआरआई को पहले से सूचना मिली थी कि ट्रेन के जरिए मादक पदार्थ की खेप पंजाब ले जाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर टीम ने गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर निगरानी बढ़ाई।

ट्रेन के स्टेशन पहुंचने के बाद डीआरआई की टीम संबंधित कोच में पहुंची। संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर दो महिलाओं और एक पुरुष को हिरासत में लेकर उनकी तलाशी ली गई। जांच के दौरान महिलाओं के पास से कई पैकेट बरामद हुए। तलाशी में कुल 11 पैकेट मिले, जिनमें काला पदार्थ रखा हुआ था। जांच के बाद पदार्थ की पहचान चरस के रूप में की गई।

अधिकारियों के अनुसार महिलाओं ने कथित तौर पर मादक पदार्थ को अपने कपड़ों और शरीर के आसपास छिपाकर रखा था। चरस के कुछ पैकेट जांघों के आसपास घुटने के कैप में लपेटकर छिपाए गए थे, जबकि कुछ सामग्री साड़ी के भीतर रखी गई थी। इस तरीके से सुरक्षा जांच से बचते हुए मादक पदार्थ को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी।

बरामदगी के बाद डीआरआई ने चरस को जब्त कर लिया और तीनों आरोपियों के खिलाफ मादक पदार्थों की तस्करी से संबंधित कानूनी कार्रवाई शुरू की। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। शुक्रवार को तीनों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद चरस की खेप कहां से हासिल की गई थी और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि पंजाब में खेप किस व्यक्ति या नेटवर्क तक पहुंचाई जानी थी। तस्करी के इस नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में तस्करी की गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं। सिद्धार्थनगर के मोहाना थाना क्षेत्र से लगी भारत-नेपाल सीमा पर यूरिया खाद, चीनी, दाल, तेल और कपड़े जैसी वस्तुओं की अवैध आवाजाही की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

खुली सीमा और कई पगडंडी मार्गों के कारण तस्करों को निगरानी से बचने के अवसर मिलने की बात सामने आई है। सुरक्षा बलों की गश्त के बीच ड्यूटी बदलने के समय का फायदा उठाकर सामान सीमा पार पहुंचाने की कोशिश किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।


  • स्थानीय पुलिस के अनुसार तस्करी रोकने के लिए सिविल पुलिस और सशस्त्र सीमा बल की संयुक्त गश्त की जाती है। संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने के साथ तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। गोरखपुर में चरस बरामदगी के मामले की आगे की जांच में तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने पर विशेष जोर रहेगा।

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