
नई दिल्ली: 2013 के झीरम घाटी नक्सल हमले में शनिवार (4 सितंबर) को जगदलपुर NIA की स्पेशल कोर्ट ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है. 13 साल बाद आए इस ऐतिहासिक फैसले में फिलहाल सजा नहीं सुनाई गई है. स्पेशल कोर्ट ने 101 गवाहों के बयानों और सबूतों के आधार पर यह अहम फैसला दिया है. दोषियों की सजा की अवधि तय करने के लिए 16 सितंबर 2025 की तारीख सुरक्षित रखी गई है.
छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम क्या बोले?
झीरम हमले पर आए NIA के फैसले पर छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंह देव ने कहा है कि मैं तब तक संतुष्ट नहीं हूं, जब तक यह तय नहीं हो जाता कि वह घटना कैसे होने दी थी. इन लोगों ने इसे अंजाम दिया, वह एक अलग बात है, लेकिन पूरा इलाका बिल्कुल कैसे खाली छोड़ दिया गया?
सिंह देव ने आगे कहा कि पूरी जानकारी होने के बावजूद प्रशासन ने इंतजाम क्यों नहीं किए? असल में गलती उन्हीं की है. IAS-IPS ये तो बस पद हैं. सबसे जरूरी बात जवाबदेही है. यह किसकी जिम्मेदारी थी, जब विपक्ष के बड़े नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री, पार्टी अध्यक्ष, जो पहले गृहमंत्री भी रह चुके हैं.
क्या हुआ था मई 2013 में?
हमला 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित दरभा थाना इलाके की झीरम घाटी में हुआ था. घटना की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठे थे. इसकी वजह उस समय छत्तीगसढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले थे, कांग्रेस पार्टी के नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर परिवर्तन यात्रा के तहत लौट रहा था.
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व हो गया था खत्म
कांग्रेस के इस काफिले पर घात लगाकर बैठे सैकड़ों भारी हथियारों से लैस नक्सलियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया. बारूदी सुरंग का विस्फोट किया और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. इस हमले में 32 लोगों की निर्मम हत्या हुई थी. इसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस का लगभग शीर्ष नेतृत्व एक साथ खत्म हो गया था.
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