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उज्जैन में हनुमान जी की प्रतिमा पर बड़ा संकट? हटाने से पहले प्रशासन से मांगी लिखित गारंटी

September 05, 2026

उज्जैन। धार्मिक एवं ऐतिहासिक नगरी उज्जैन में विकास और सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत करीब 170 साल पुराने प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को विस्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कंठाल से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन यह कार्रवाई कर रहा है। 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम का साक्षी रहा यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उज्जैनवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र भी है।

मंदिर के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू होते ही पाँच पीढ़ियों से मंदिर की सेवा कर रहे पुजारी परिवार और स्थानीय श्रद्धालु भावुक हो गए हैं। इस बीच सबसे बड़ा विवाद हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने को लेकर खड़ा हो गया है।


  • पुरातत्व विभाग ने जताई प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने की आशंका
    पुरातत्व विभाग की टीम ने मंदिर परिसर और हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा का निरीक्षण किया है। इसके बाद विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि इतनी पुरानी प्रतिमा को हिलाने या विस्थापित करने के दौरान उसमें दरार आ सकती है या प्रतिमा खंडित होने का खतरा भी है। पुरातत्व विभाग की इस आशंका के बाद स्थानीय श्रद्धालुओं, मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित महेश बैरागी और हिंदूवादी संगठनों की चिंता बढ़ गई है।

    पुजारी की मांग- पहले लिखित गारंटी दे प्रशासन
    मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित महेश बैरागी का कहना है कि प्रशासन भगवान श्री खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने के नाम पर प्रयोग कर रहा है। पुजारी परिवार और हिंदूवादी संगठनों ने मांग की है कि प्रशासन या तो विस्थापन की कार्रवाई रोके या फिर लिखित में प्रतिमा की सुरक्षा की गारंटी दे।

    उनका कहना है कि यदि विस्थापन के दौरान प्रतिमा में जरा सी भी दरार आती है या प्रतिमा खंडित होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होनी चाहिए। संगठनों ने साफ कहा है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक विस्थापन की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।

    सड़क चौड़ीकरण की जद में पांच मंदिर
    दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि उज्जैन में बढ़ते यातायात और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कंठाल से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण जरूरी है। इस परियोजना की जद में कुल पांच मंदिर आ रहे हैं, जिन्हें धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं का ध्यान रखते हुए दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जा रहा है।

    अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा और मंदिर की धार्मिक गरिमा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। विस्थापन की प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी और पूरी सावधानी के साथ की जाएगी। फिलहाल, सड़क चौड़ीकरण और शहर के विकास को लेकर प्रशासन अपने फैसले पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन पुरातत्व विभाग की आशंका और प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर लिखित गारंटी की मांग ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है।

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