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नेपाल आपदा में मृतकों की संख्या 1344 पहुंची, मलबे से बुजुर्ग महिला और चीनी नागरिक को बचाने में मिली सफलता

September 06, 2026

नई दिल्ली ।नेपाल (Nepal) में 26 अगस्त को आए विनाशकारी हिमस्खलन (Avalanche) और उसके बाद भोटेकोशी नदी (Bhotekoshi River) में आई भीषण बाढ़ (Flood) के 11 दिन बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। प्राकृतिक (Natural) आपदा ने बड़े पैमाने पर जान-माल (Casualties) का नुकसान किया है और कई इलाकों में राहत तथा बचाव अभियान अभी भी जारी है। इस आपदा का असर नेपाल की अर्थव्यवस्था (Economy) और सीमापार व्यापार (Trade) पर भी दिखाई दे रहा है।

चीन और नेपाल के बीच जमीनी व्यापार के प्रमुख केंद्र ग्यिरोंग पोर्ट और उससे जुड़ी सीमा चौकी को भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ और मलबे के कारण इस मार्ग पर व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। यह मार्ग दोनों देशों के बीच माल ढुलाई और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

ग्यिरोंग क्रॉसिंग के बाधित होने से नेपाल में चीनी सामानों की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। माल की आवाजाही, जांच, सीमा शुल्क प्रक्रिया और भंडारण से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी इसका असर पड़ा है। आपूर्ति शृंखला में रुकावट के कारण घरेलू बाजार में कुछ वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित होने और महंगाई का दबाव बढ़ने की स्थिति बनी है।

आपदा से क्षतिग्रस्त मार्ग को दोबारा पूरी तरह चालू करने में समय लग सकता है। प्रभावित पहाड़ी इलाकों से बड़े पैमाने पर मलबा हटाने के साथ सड़कों और पुलों की मरम्मत जरूरी होगी। कई स्थानों पर पहाड़ी रास्तों को सुरक्षित बनाना और भूस्खलन तथा हिमस्खलन से जुड़े संभावित खतरों को कम करना भी राहत एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है।

इस आपदा के बीच राहत अभियान में दो लोगों को मलबे और सुरंग से जीवित बचाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। नुवाकोट जिले के बिदुर शहर में 60 वर्षीय चंडिका श्रेष्ठ को चार मंजिला इमारत के मलबे से सुरक्षित निकाला गया। वह इमारत की ऊपरी मंजिल पर कीचड़ और मलबे के नीचे फंसी हुई थीं।

परिजनों ने उनके जीवित मिलने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। इसके बावजूद बचाव दल ने अभियान जारी रखा और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। लंबे समय तक मलबे में फंसे रहने के बाद उनका जीवित मिलना राहत अभियान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।

इसी दौरान अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना से जुड़ी एक सुरंग से एक चीनी नागरिक को भी बचाया गया। बचाव दलों ने कठिन परिस्थितियों के बीच सुरंग तक पहुंचकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला। दोनों घटनाओं ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जारी खोज और बचाव अभियानों के महत्व को रेखांकित किया है।

आपदा से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1344 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। करीब 5000 लोग अब भी लापता बताए गए हैं, जिनमें 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं। लापता लोगों में भारत के 250 से अधिक नागरिकों के शामिल होने की बात भी सामने आई है।

बाढ़ की भयावहता का अंदाजा उन लोगों के अनुभवों से लगाया जा सकता है, जिन्होंने समय रहते ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहुंचकर अपनी जान बचाई। प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों के अनुसार अचानक बढ़ी नदी की धारा के कारण बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। कई लोग बच गए, जबकि कुछ अन्य तेज बहाव की चपेट में आ गए।


  • नेपाल में राहत अभियान के साथ अब सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित बुनियादी ढांचे को बहाल करना और सीमा व्यापार को दोबारा सुचारू करना है। व्यापक नुकसान के कारण सामान्य स्थिति लौटने में समय लग सकता है। इस बीच प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने, लापता लोगों की तलाश और जोखिम वाले क्षेत्रों में बचाव कार्य जारी रखना प्राथमिकता बनी हुई है।

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