img-fluid

कार्बोहाइड्रेट छोड़ना, जरूरत से ज्यादा फल खाना और खुद से सप्लीमेंट लेना बन सकता है पोषण संबंधी बड़ी गलती

September 06, 2026

नई दिल्ली ।शरीर (Body) को रोजमर्रा के कामकाज के लिए ऊर्जा (Energy) के साथ कई जरूरी पोषक तत्वों (Nutrients) की आवश्यकता होती है। विटामिन, प्रोटीन, खनिज, फाइबर, वसा और कार्बोहाइड्रेट संतुलित मात्रा में मिलने पर शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली बेहतर ढंग से चलती है। हालांकि खानपान (Diet) को लेकर सोशल मीडिया और आम बातचीत में कई ऐसी धारणाएं (Beliefs) प्रचलित हैं, जिन्हें लोग बिना जांचे सही मान लेते हैं।

स्वस्थ आहार का मतलब किसी एक खाद्य पदार्थ को सबसे ज्यादा महत्व देना या किसी एक पोषक तत्व को पूरी तरह खत्म कर देना नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्तता, संतुलन, सीमित मात्रा और भोजन में विविधता स्वस्थ खानपान के प्रमुख आधार हैं। इसलिए डाइट में बदलाव करते समय पूरे पोषण संतुलन को ध्यान में रखना जरूरी है।

कार्बोहाइड्रेट को लेकर सबसे आम धारणा यह है कि इससे वजन बढ़ता है और इसलिए इसे डाइट से पूरी तरह हटा देना चाहिए। वास्तव में कार्बोहाइड्रेट शरीर के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। समस्या केवल कार्बोहाइड्रेट में नहीं, बल्कि उसके स्रोत और सेवन की मात्रा में होती है।

साबुत अनाज, दालें, फल और सब्जियां कार्बोहाइड्रेट के साथ फाइबर तथा अन्य पोषक तत्व भी उपलब्ध कराती हैं। इसके विपरीत अत्यधिक प्रोसेस्ड और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन वजन तथा रक्त शर्करा से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह छोड़ने के बजाय बेहतर स्रोतों और उचित मात्रा पर ध्यान देना अधिक व्यावहारिक है।

फलों को लेकर भी एक गलतफहमी आम है कि जितना ज्यादा फल खाया जाए, उतना ही अधिक स्वास्थ्य लाभ मिलेगा। फल निश्चित रूप से संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन किसी भी खाद्य पदार्थ की तरह इनका सेवन भी उचित मात्रा में होना चाहिए। जरूरत से बहुत ज्यादा फल खाने से कुल कैलोरी और प्राकृतिक शर्करा का सेवन बढ़ सकता है, खासकर तब जब आहार पहले से ही असंतुलित हो।

दस वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए रोजाना कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियों के सेवन की सलाह दी जाती है। इसमें विविधता बनाए रखना महत्वपूर्ण है, ताकि शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिल सकें। केवल एक या दो प्रकार के फल पर निर्भर रहना संतुलित आहार का विकल्प नहीं है।

एक अन्य महत्वपूर्ण मिथक सप्लीमेंट से जुड़ा है। कई लोग बिना किसी जांच या विशेषज्ञ की सलाह के विटामिन और खनिजों की गोलियां लेना शुरू कर देते हैं। हालांकि कुछ परिस्थितियों में सप्लीमेंट जरूरी हो सकते हैं, लेकिन इनकी आवश्यकता व्यक्ति की पोषण स्थिति और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर निर्भर करती है।

बिना जरूरत या अत्यधिक मात्रा में सप्लीमेंट लेना हमेशा लाभकारी नहीं होता। कुछ पोषक तत्वों की अधिक मात्रा शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकती है। इसलिए पोषण संबंधी कमी की पुष्टि होने या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह मिलने पर ही सप्लीमेंट लेना उचित माना जाता है।


  • राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के दौरान संतुलित भोजन के महत्व को समझना विशेष रूप से उपयोगी है। स्वस्थ खानपान किसी एक ट्रेंडिंग डाइट, सुपरफूड या सप्लीमेंट पर निर्भर नहीं करता। रोज के भोजन में पर्याप्त मात्रा, विविधता और संतुलन बनाए रखना ही बेहतर पोषण की बुनियाद है। किसी भी विशेष स्वास्थ्य स्थिति या पोषण संबंधी कमी में व्यक्तिगत सलाह लेना अधिक सुरक्षित विकल्प है।

    Share:

  • अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी का रिश्ता क्यों टूटा? सुनील दर्शन का दावा- गलतफहमियां न होतीं तो शायद हो जाती शादी

    Sun Sep 6 , 2026
    नई दिल्ली । बॉलीवुड(Bollywood) में कई ऐसी प्रेम कहानियां (love stories)रही हैं जो अपने दौर में खूब चर्चा में रहीं लेकिन किसी कारण शादी तक नहीं पहुंच सकीं। अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी का रिश्ता भी ऐसी ही चर्चित जोड़ियों में शामिल रहा है। ट्विंकल खन्ना (Twinkle Khanna)से शादी से पहले अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved