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दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल की कमान, यूपी में 2027 चुनाव से पहले बीजेपी ने लिया बड़ा फैसला

September 06, 2026

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. दिनेश शर्मा (Dr. Dinesh Sharma) को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह (Andaman and Nicobar Islands) का नया उपराज्यपाल नियुक्त (Appointed Lieutenant Governor) किया गया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से शनिवार देर रात जारी आदेश के मुताबिक, उनकी नियुक्ति उस दिन से प्रभावी होगी, जिस दिन वे उपराज्यपाल के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

62 वर्षीय दिनेश शर्मा फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं। उनका राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2026 में पूरा होना था। ऐसे में उच्च सदन का कार्यकाल खत्म होने से पहले उन्हें केंद्र शासित प्रदेश की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपे जाने को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

लखनऊ के मेयर से डिप्टी सीएम और राज्यसभा तक का सफर
दिनेश शर्मा का राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश की राजनीति के साथ लंबे समय से जुड़ा रहा है। 2017 से 2022 के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले कार्यकाल में वे उपमुख्यमंत्री रहे। इस दौरान उन्हें माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली थी।

सक्रिय राजनीति में आने से पहले वे लखनऊ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में प्रोफेसर रहे। इसके बाद उन्होंने स्थानीय राजनीति में पहचान बनाई और दो बार लखनऊ के मेयर चुने गए। 2008 में पहली बार मेयर बनने के बाद 2012 में उन्होंने दोबारा यह जिम्मेदारी संभाली।


  • भाजपा संगठन में भी उनका कद बढ़ता गया। 2014 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। वे भाजपा के गुजरात प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 2023 में दिनेश शर्मा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। उनका राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2026 तक था।

    2027 के यूपी चुनाव के बीच क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?
    दिनेश शर्मा को नई जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसी वजह से उनकी नियुक्ति को केवल प्रशासनिक बदलाव के रूप में नहीं देखा जा रहा है।

    भाजपा ने भी यूपी चुनाव की तैयारियों के लिहाज से संगठन में बदलाव किए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को जगह मिली है। इसे राज्य में संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    ब्राह्मण चेहरे के तौर पर भी चर्चा
    दिनेश शर्मा ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और उत्तर प्रदेश भाजपा में लंबे समय से इस समुदाय के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। इसलिए उनकी नियुक्ति को यूपी के सामाजिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

    राजनीतिक जानकारों के मुताबिक भाजपा के सामने 2027 में एक साथ कई सामाजिक समूहों को साधने की चुनौती होगी। पार्टी अपने पारंपरिक सवर्ण आधार को बनाए रखने के साथ OBC, दलित और अन्य सामाजिक वर्गों के बीच भी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

    हालांकि, दिनेश शर्मा की नियुक्ति को सिर्फ जातीय समीकरण से जोड़ना पूरी तस्वीर नहीं होगी। विश्वविद्यालय, सरकार, संगठन और संसद—चारों स्तरों पर उनका लंबा अनुभव भी इस जिम्मेदारी के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

    हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाना भी चर्चा में
    यूपी में भाजपा की सामाजिक रणनीति को लेकर चर्चा के बीच पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को भी नितिन नवीन की नई टीम में राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। बस्ती से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके द्विवेदी लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ था।

    हरीश द्विवेदी भी ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और उत्तर प्रदेश में उनका संगठनात्मक आधार रहा है। उनकी नई जिम्मेदारी को भी पार्टी के यूपी फोकस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भाजपा की रणनीति में एक तरफ ब्राह्मण चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल रही हैं, तो दूसरी ओर OBC, दलित और मुस्लिम समुदायों से जुड़े नेताओं को भी संगठन में स्थान दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी सामाजिक समीकरणों को किसी एक वर्ग तक सीमित रखने के बजाय व्यापक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

    राज्यसभा में 94% उपस्थिति, 226 सवाल और 34 बहसों में हिस्सा
    अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल का पद संवैधानिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। दिनेश शर्मा के पास अकादमिक और राजनीतिक अनुभव के साथ संगठन और संसद का भी अनुभव है। अगस्त 2026 तक राज्यसभा में उनकी 94% उपस्थिति रही। इस दौरान उन्होंने 226 सवाल पूछे और 34 बहसों में हिस्सा लिया। अब उनके सामने केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। खास बात यह है कि यह बदलाव उनके राज्यसभा कार्यकाल के समाप्त होने से कुछ महीने पहले हुआ है।

    2024 के झटके के बाद भाजपा की यूपी में नई रणनीति
    उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद अहम है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को राज्य में अपेक्षाकृत झटका लगा था। इसके बाद संगठन में चुनावी प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और सामाजिक समीकरणों को लेकर मंथन हुआ।

    इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय संगठन में यूपी से आठ नेताओं को जगह, हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी और अब दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल बनाए जाने को पार्टी की व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन फैसलों का सीधे तौर पर 2027 के चुनावी समीकरण पर कितना असर पड़ेगा। लेकिन इतना जरूर है कि भाजपा उत्तर प्रदेश में संगठन, सामाजिक संतुलन और अनुभवी चेहरों—तीनों पर एक साथ फोकस करती दिखाई दे रही है।

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