
आज महापौर और आयुक्त ने दिल्ली पहुंचकर लिया केन्द्र सरकार से सम्मान
इंदौर। शहर (Indore) के नागरिक (Citizen) बीते दो-तीन सालों से इस बात पर भी आश्चर्य जताते हैं कि इंदौर को स्वच्छता (Cleanliness) में नम्बर वन का खिताब अब कैसे मिल रहा है, क्योंकि पहले की तुलना में अब जगह-जगह गंदगी और कचरे के ढेर नजर आते हैं। इसी तरह सालों पहले ग्रीन और क्लिन सिटी का भी बोगस अवॉर्ड इंदौर को मिल गया था, जो अब राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण (‘Clean Air Survey’) के चलते इंदौर को एक और अवॉर्ड मिल गया, जो आज दिल्ली जाकर महापौर और आयुक्त ने हासिल भी किया।
वार्ड स्तरीय प्रतिस्पर्धा में भोपाल निगम के वार्ड 60 ने वायु गुणवत्ता सुधार और हरित विकास में पहला स्थान हासिल किया। वहीं इंदौर शहर को स्वच्छ वायु प्रबंधन में यह अवॉर्ड दिया गया और यह बताया कि धूल नियंत्रण, वैज्ञानिक सड़क सफाई, हरित पट्टियों के विकास और ठोस कचरा अपशिष्ट प्रबंधन के साथ शहर की आबो हवा को निर्मल किया गया। जबकि दूसरी तरफ हकीकत यह है कि धूल, धुआं और अभी तो हल्की बारिश में ही शहर की अधिकांश सड़कें गड्ढामय हो गई है और उस पर सबसे अधिक प्रताडऩा दिनभर लगने वाले यातायात जाम से नागरिकों को मिलती है। यानी धूल, धुएं, गड्ढों के साथ-साथ जाम शहर को स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार से आज अलंकृत किया गया। नई दिल्ली के इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा ऑडिटोरियम में केन्द्रीय पर्यावरण वन व जलवायु एवं परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने यह अवॉर्ड दिया। महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और महापौर परिषद् सदस्य अश्विनी शुक्ल ने यह अवॉर्ड दिल्ली जाकर हासिल किया।
एक नंबर से इंदौर चूक गया पहला स्थान
हालांकि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में इंदौर शहर पहले स्थान पर आने से एक नंबर से चूक गया और लखनऊ पहले नंबर पर आ गया है। स्वच्छता के क्षेत्र में पूरे देश में अपने आप को स्थापित कर अब तक यह स्पष्ट था कि इंदौर टॉप 3 शहरों में शामिल है। आज दिल्ली में यह स्पष्ट हुआ कि इस सर्वेक्षण में लखनऊ विजेता रहा है और दूसरे स्थान पर इंदौर रहा है। तीसरा स्थान भी मध्य प्रदेश के ही जबलपुर शहर को मिला है। इस सर्वेक्षण में पहले स्थान के लिए इंदौर और लखनऊ के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा हुई। इस प्रतिस्पर्धा में मात्र एक नंबर ज्यादा हासिल कर लखनऊ नंबर वन बन गया। स्वच्छ वायु के लिए ठोस अपशिष्ट का निष्पादन, यातायात की व्यवस्था और औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण को पैमाना रखा गया था। ठोस अपशिष्ट के निष्पादन में इंदौर पूरे देश में सबसे आगे है इसलिए कहीं कोई समस्या नहीं थी। इंदौर शहर में स्वाइप मशीन के माध्यम से धूल के कण भी साफ किए जाते हैं। हर दिन डस्टबिन का कचरा हटाए जाने के कारण इस कचरे से वायु प्रदूषण नहीं होती है। यातायात के क्षेत्र में इंदौर के द्वारा रेड लाइट ओन इंजन ऑफ जैसे अभियान चलाए गए हैं। इसके साथ ही इंदौर में बड़ी संख्या में आई वहां और सीएनजी वहां का चलन बढ़ने से वायु में कार्बन के कण कम हुए है। औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए नगर निगम के द्वारा बड़ा अभियान चलाकर औद्योगिक क्षेत्र में भी सीएनजी के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करवाया गया था। इन सभी प्रयासों का ही यह परिणाम रहा है कि इंदौर दूसरे नंबर पर आ सका है। नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा ऑडिटोरियम में होने वाले स्वच्छ वायु दिवस समारोह में इंदौर को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव परिणामों की औपचारिक घोषणा करेंगे।
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