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इंदौर: शास्त्री ब्रिज तोड़ने पर यातायात कैसे संभलेगा

September 07, 2026

मामला सिंहस्थ से पूर्व निर्माण शुरू करने के दावे का, 139 करोड़ का फोरलेन प्रोजेक्ट मंजूर मगर इतने समय तक ट्रैफिक डायवर्जन कैसे और कहां करेंगे यह सबसे बड़ी दिक्कत

इंदौर। 70 साल पुराने शास्त्री ब्रिज (Shastri Bridge)  को तोड़कर (demolished) 139 करोड़ रुपए का नया फोरलेन ब्रिज (Four-lane bridge)  निर्मित किया जाना है। मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने समय तक रीगल से पश्चिमी क्षेत्र की ओर जाने वाले अत्यधिक घने यातायात (traffic) को किस तरह और कहां पर डायवर्ट किया जाए। इसको लेकर शासन-प्रशासन, पुलिस, रेलवे सहित जनप्रतिनिधियों द्वारा मंथन किया जा रहा है और तमाम वैकल्पिक उपाय भी खोजे जा रहे हैं, जिसमें आरएनटी मार्ग से एक नए ब्रिज के निर्माण के अलावा राजकुमार ब्रिज सहित उन पुराने मार्गों को भी चौड़ा करना पड़ेगा, जिसके माध्यम से राजवाड़ा और उससे जुड़े क्षेत्रों में पहुंचा जा सकता है।


  • रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने जहां रेल प्रोजेक्टों की समीक्षा इंदौर पहुंचकर की, वहीं उन्होंने सिंहस्थ से जुड़ी जानकारी तो दी ही, साथ ही यह दावा भी किया कि शास्त्री ब्रिज के निर्माण का कार्य सिंहस्थ बाद नहीं, बल्कि अभी से शुरू कर दिया जाएगा। खासकर ब्रिज निर्माण की ड्राइंग-डिजाइन, टेंडर बुलाने, मंजूर करने के साथ पिलरों का निर्माण भी किया जा सकता है और फिर मूल ओवरब्रिज का निर्माण सिंहस्थ बाद शुरू किया जाए। इस बारे में जब आज सुबह सांसद शंकर लालवानी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ब्रिज निर्माण से पहले की प्रक्रिया सिंहस्थ से पहले शुरू कर दी जाएगी। मगर अभी मुख्य समस्या यह है कि शास्त्री ब्रिज को तोडऩे पर जो इतना घना यातायात है उसे कहां और कैसे डायवर्ट किया जाए, ताकि पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र का आवागमन ब्रिज निर्माण के चलते लगातार इतना अधिक बाधित ना हो। शास्त्री ब्रिज तोडऩे पर इसका सबसे ज्यादा भार पटेल ब्रिज पर आएगा, जो अभी पहले से ही पुराना होने के साथ इस पर भी यातायात का दबाव अत्यधिक रहता है और इस ब्रिज से जवाहर मार्ग जाना वर्तमान में ही अत्यंत मुश्किल होता है, तो ऐसे में शास्त्री ब्रिज का अतिरिक्त यातायात भी इस पर शिफ्ट करने के बाद स्थिति अत्यंत गंभीर हो जाएगी। श्री लालवानी के मुताबिक, उन्होंने यह सुझाव भी दिया है कि क्या आरएनटी मार्ग से एक नया ब्रिज बनाया जा सकता है, जो झाबुआ टॉवर से शुरू होकर एमटीएच की ओर उतरे। इसके अलावा राजकुमार ब्रिज के साथ-साथ एलआईजी, एमआईजी होते हुए अटल द्वार और उसके बाद परदेशीपुरा से भंडारी ब्रिज होते हुए भी शहर के मध्य मार्ग यानी एमजी रोड, राजवाड़ा, जवाहर मार्ग, राजमोहल्ला सहित अन्य क्षेत्रों में पहुंचा जा सकता है। मगर इन तमाम वैकल्पिक मार्गों को भी चौड़ा करने के साथ-साथ बाधा मुक्त भी करना पड़ेगा। तब ही शास्त्री ब्रिज के इतने घने यातायात को ओवरब्रिज निर्माण के चलते कम से कम दो साल तक डायवर्ट करना पड़ेगा। यह भी उल्लेखनीय है कि शास्त्री ब्रिज के निमाण के लिए रेलवे ने 139 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है, जहां पर पुराने ब्रिज की जगह नया फोरलेन का ओवरब्रिज बनाया जाएगा, जिसमें दोनों ओर सर्विस रोड का प्रावधान भी रहेगा। नया ब्रिज 72 मीटर लम्बा होगा। इस पर 6-6 मीटर की सर्विस रोड निर्मित की जाएगी। मौजूदा सीवर लाइन की शिफ्टिंग के अलावा अन्य यूटीलिटी सेवाओं को भी नए सिरे से स्थापित करना पड़ेगा। मगर अभी सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल यही है कि शास्त्री ब्रिज के तोड़े जाने पर अभी जो वर्तमान में यातायात रीगल से लेकर एमजी रोड होते हुए मध्य क्षेत्र जाता है उसके लिए वैकल्पिक उपाय क्या किए जाएं। यही कारण है कि अभी सिंहस्थ के मद्देनजर इस 70 साल पुराने शास्त्री ब्रिज के पुनर्निर्माण को आगे बढ़ा दिया गया था।

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