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World Physiotherapy Day 2026: स्ट्रोक के बाद फिजियोथेरेपी से मूवमेंट और बैलेंस सुधारने में मिल सकती है मदद, डॉक्टर ने समझाया महत्व

September 08, 2026

नई दिल्ली । 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 (World Physiotherapy Day 2026) मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) के महत्व और इसके विभिन्न फायदों के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष की थीम हार्ट डिजीज (Heart Disease) और स्ट्रोक (Stroke) की रोकथाम, प्रबंधन तथा रिहैबिलिटेशन (Rehabilitation) में फिजियोथेरेपी की भूमिका पर केंद्रित है। विशेषज्ञों के अनुसार फिजियोथेरेपी को केवल हड्डियों से जुड़ी समस्याओं या दर्द के इलाज तक सीमित समझना सही नहीं है। स्ट्रोक के बाद मरीज की रिकवरी और रिहैबिलिटेशन में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।

अक्सर लोग फिजियोथेरेपी को कमर, घुटने, कंधे या शरीर के किसी हिस्से में होने वाले दर्द से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल इससे कहीं व्यापक है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित और सही तरीके से की जाने वाली फिजियोथेरेपी हार्ट डिजीज से बचाव में भी मदद कर सकती है। वहीं, स्ट्रोक आने के बाद मरीज को होने वाली शारीरिक परेशानियों को नियंत्रित करने और उसकी कार्यक्षमता बेहतर करने के लिए रिहैबिलिटेशन जरूरी होता है।

स्ट्रोक के बाद मरीजों में हाथ-पैर की कमजोरी, चलने में परेशानी, शरीर का संतुलन बिगड़ना और रोजमर्रा के सामान्य काम करने में कठिनाई जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। मरीज की स्थिति को ध्यान में रखते हुए की जाने वाली फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन से मूवमेंट तथा बैलेंस को बेहतर करने में मदद मिल सकती है। इसलिए स्ट्रोक के बाद रिहैबिलिटेशन को केवल अस्पताल में होने वाली प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखना चाहिए।

विशेषज्ञों के मुताबिक मरीज और उसके परिवार को घर पर भी सुरक्षित तरीके से बताई गई एक्सरसाइज जारी रखनी चाहिए। इससे रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। मरीज की स्थिति के अनुसार फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज का तरीका अलग हो सकता है, इसलिए इसे उसकी जरूरत के मुताबिक किया जाना महत्वपूर्ण है।

फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। अब मोशन एनालिसिस, सेंसर-बेस्ड मॉनिटरिंग, वियरेबल डिवाइस, डिजिटल एक्सरसाइज प्रोग्राम और रोबोटिक रिहैबिलिटेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तकनीकों के जरिए फिजियोथेरेपी को पहले की तुलना में अधिक तकनीक आधारित बनाया जा रहा है।

डॉ. इंद्रमणि उपाध्याय के अनुसार आज के समय में कम मूवमेंट वाली लाइफस्टाइल एक बड़ी समस्या बन रही है। ऑफिस में लंबे समय तक बैठे रहना, स्क्रीन टाइम बढ़ना और एक्सरसाइज की कमी शरीर को धीरे-धीरे कमजोर कर रही है। ऐसे में हर उम्र के व्यक्ति के लिए एक्सरसाइज करना जरूरी है। उनके मुताबिक नियमित शारीरिक गतिविधि का फायदा यह है कि इससे हार्ट डिजीज समेत कई बीमारियों से बचाव में मदद मिल सकती है।


  • विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर फिजियोथेरेपी की भूमिका को केवल दर्द और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं तक सीमित न मानने पर जोर दिया गया है। स्ट्रोक के बाद मरीज की मूवमेंट, बैलेंस और रोजमर्रा की गतिविधियों को बेहतर बनाने के लिए रिहैबिलिटेशन के साथ फिजियोथेरेपी को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

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