
नई दिल्ली। राजस्थान (Rajasthan) में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ (One State, One Election) की दिशा में पहला बड़ा चुनावी प्रयोग शुरू हो गया है। नगरीय निकाय चुनाव (Urban Local Body Elections) के पहले चरण के लिए आज मतदान हो रहा है। राज्य के कुल 309 नगरीय निकायों में चुनाव कराए जा रहे हैं, जिनमें पहले चरण में 162 निकायों के लिए वोट डाले जा रहे हैं। इनमें 4 नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगर पालिकाएं शामिल हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की है। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही बूथों की निगरानी के लिए CCTV और वेबकास्टिंग की व्यवस्था भी की गई है।
39 जिलों के 5,393 वार्डों में मुकाबला
पहले चरण में राजस्थान के 39 जिलों के 5,393 वार्डों में मतदान हो रहा है। इस चरण में कुल 20,623 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं और उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला 57,52,278 मतदाता करेंगे।
चार नगर निगमों अलवर, भरतपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा के वार्ड पार्षदों के लिए भी आज वोट डाले जा रहे हैं। वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों के प्रमुख नगर निगमों में चुनाव दूसरे चरण में होंगे।
हालांकि जयपुर जिले की 18 अन्य नगरीय निकायों, जिनमें चौमूं, बगरू और शाहपुरा जैसे इलाके शामिल हैं, में पहले चरण में मतदान कराया जा रहा है।
27 नगर परिषदों में भी मुकाबला
पहले चरण में 27 नगर परिषदों के वार्डों के लिए चुनाव हो रहा है। इनमें नागौर, ब्यावर, कोटपूतली, चूरू, सुजानगढ़, धौलपुर, सवाई माधोपुर, शाहपुरा, चौमू, फतेहपुर, झुंझुनूं, जालोर, बारां, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, डीडवाना-कुचामन, करौली, भिवाड़ी, खैरथल-तिजारा, जैसलमेर और बाड़मेर शामिल हैं।
इसके अलावा 131 नगर पालिकाओं के वार्डों में पार्षद पद के लिए चुनाव हो रहा है। इनमें केकड़ी, पीसांगन, सरवाड़, नसीराबाद, सावर, तांतोटी, जायल, मूंडवा, बासनी, कुचेरा, निवाई, पीपलू, देवली, उनियारा, दूनी, विजयनगर, मसूदा, बीगोद, पावटा-प्रागपुरा, विराटनगर, नारायणपुर, बानसूर, सूरतगढ़, श्रीविजयनगर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, घड़साना, नोहर, भादरा, संगरिया, टिब्बी, रावतसर, राजगढ़, रतननगर, छापर, भुसावर, रूपवास, राजाखेड़ा, मनियां, सैपऊ, बौंली और खंडार समेत अन्य नगर पालिकाएं शामिल हैं।
जयपुर जिले की बगरू, चाकसू, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, फुलेरा, सांभर, बस्सी, दूदू, जमवारामगढ़, कालाडेरा, कानोता, खेजरोली, मनोहरपुर, नारायणा, फागी और वाटिका नगर पालिकाओं में भी पहले चरण में मतदान कराया जा रहा है।
BJP के सामने शहरी गढ़ बचाने की चुनौती
पहले चरण के नतीजे BJP के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण होंगे। दिसंबर 2023 में भजनलाल शर्मा सरकार के सत्ता संभालने के बाद शहरी मतदाताओं के बीच यह उसकी पहली बड़ी चुनावी परीक्षा है। ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत निकाय चुनाव कराने के फैसले के बाद इनके परिणामों को सरकार के कामकाज और नीतियों पर जनता की प्रतिक्रिया के तौर पर भी देखा जा सकता है।
राजस्थान के शहरी निकायों को लंबे समय से BJP के मजबूत जनाधार वाले क्षेत्रों में गिना जाता रहा है। ऐसे में बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर और भरतपुर जैसे नगर निगमों में पार्टी के सामने अपना प्रभाव बनाए रखने की चुनौती है।
इस बार BJP ने कई पुराने पार्षदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका दिया है। इससे पार्टी के भीतर टिकट नहीं मिलने वाले नेताओं की नाराजगी और बागियों के निर्दलीय मैदान में उतरने का मुद्दा भी अहम बन गया है। पार्टी के सामने भितरघात रोकने और बागियों को साधने की चुनौती है।
कांग्रेस के लिए खोई जमीन वापस लेने का मौका
कांग्रेस के लिए भी ये चुनाव कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद पार्टी राजस्थान के शहरी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। निकाय चुनाव उसे स्थानीय स्तर पर वापसी का अवसर दे रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस ने प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता दी है। सफाई, सड़क, बिजली और स्थानीय प्रशासन की कथित नाकामियों को पार्टी ने चुनावी मुद्दा बनाया है।
58 लाख युवा वोटर बदल सकते हैं समीकरण
इन चुनावों में युवा मतदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है। 18 से 25 वर्ष की उम्र के करीब 21.30 लाख मतदाता हैं। वहीं 26 से 35 वर्ष आयु वर्ग में करीब 36.60 लाख मतदाता हैं। यानी 18 से 35 वर्ष की उम्र के करीब 58 लाख मतदाता इस चुनाव में वोट डालेंगे।
वहीं 18 से 29 साल के Gen-Z मतदाताओं की संख्या करीब 35 लाख है। कुल मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी बताई गई है। ऐसे में युवाओं से जुड़े मुद्दे, स्थानीय सुविधाएं, रोजगार और शहरों की बुनियादी व्यवस्था चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
असली परीक्षा नतीजों के बाद
पहले चरण के मतदान के साथ ही BJP, कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के लिए स्थानीय स्तर पर ताकत परखने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। BJP के सामने सरकार के कामकाज के बीच अपना शहरी आधार बचाने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस के लिए यह स्थानीय राजनीति में वापसी का मौका है। वहीं ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत हो रहे इन चुनावों के नतीजे राजस्थान की आगे की राजनीतिक दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माने जाएंगे।
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