
डेस्क: पाकिस्तान ने एक बार फिर आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का दिखावा किया है. पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी FIA ने मोस्ट वांटेड आतंकियों की नई रेड बुक जारी की है. इसमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को भगोड़ा बताया गया है और उस पर इनाम की राशि बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दी गई है. मसूद अजहर पर पहले 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम था. अब इसमें 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है.
पाकिस्तान का दावा है कि मसूद अजहर उसके देश में नहीं है और वह अफगानिस्तान में छिपा हुआ है. पाकिस्तान ने यह दावा वर्ष 2021 से लगातार किया है. हालांकि, भारतीय खुफिया सूत्रों के मुताबिक, मसूद अजहर पाकिस्तान में ही मौजूद है और सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में छिपा हुआ है. सूत्रों का कहना है कि पिछले करीब छह महीनों में की गई तकनीकी निगरानी से उसके पाकिस्तान में होने के संकेत मिले हैं.
FIA की नई रेड बुक में 26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम भी शामिल हैं. इनमें वे लोग हैं, जिन्होंने हमले के लिए आतंकियों को समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने, फंडिंग करने और ऑपरेशन को मैनेज करने में मदद की थी. हालांकि, सूची में दो नामों को लेकर पाकिस्तान की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं. मुहम्मद खान और अब्दुल रहमान के नाम तो रेड बुक में हैं, लेकिन उनकी तस्वीरें, लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े होने की जानकारी और उनकी भूमिका का विस्तृत ब्यौरा हटा दिया गया है. जबकि 2021 की FIA सूची में दोनों की तस्वीर और भूमिका दर्ज थी.
FIA की सूची में 11 लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों के नाम हैं, जिन्होंने 26/11 के हमलावरों को अल-हुसैनी और अल-फौज नावों के जरिए समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने में मदद की थी. इनमें मुहम्मद अमजद खान, शाहिद गफूर, मोहम्मद उस्मान, अतीक-उर-रहमान, रियाज अहमद, मुहम्मद मुश्ताक, मुहम्मद नईम, अब्दुल शकूर, मुहम्मद साबिर सल्फी, मुहम्मद उस्मान और शकील अहमद शामिल हैं.
रेड बुक में 6 ऐसे आतंकियों के नाम भी हैं, जिन्होंने मुंबई हमले के लिए आर्थिक मदद दी थी. इनमें मुहम्मद इफ्तिखार अली ने हमलावरों और उनके हैंडलर्स के बीच बातचीत के लिए VOIP कनेक्शन तैयार करने में 70 हजार पाकिस्तानी रुपये खर्च किए थे. इसके अलावा मोहम्मद जिया ने 80 हजार, मोहम्मद अब्बास नासिर ने 2.53 लाख, जावेद इकबाल ने 1.86 लाख, मुख्तार अहमद ने 2.98 लाख और अहमद सईद ने 21 लाख पाकिस्तानी रुपये हमले के लिए दिए थे.
भारतीय सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान की यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है, जब अक्टूबर में FATF की प्लेनरी बैठक होनी है. ऐसे में पाकिस्तान की रेड बुक को अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. FIA के मुताबिक 26/11 से जुड़े 17 आतंकी पिछले 18 वर्षों से फरार हैं. लेकिन भारतीय खुफिया सूत्रों का दावा है कि ये सभी आतंकी पाकिस्तान में ही मौजूद हैं. सूत्रों के मुताबिक, उन्हें मोस्ट वांटेड घोषित करना और रेड बुक में शामिल करना महज दिखावा है.
पाकिस्तान की FIA की रेड बुक में मोस्ट वांटेड आतंकियों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. 2021 में जहां 1,330 आतंकी सूची में थे, वहीं नई सूची में यह संख्या बढ़कर 1,804 हो गई है. यानी करीब 35 फीसदी की बढ़ोतरी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर पाकिस्तान वास्तव में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, तो 26/11 जैसे बड़े आतंकी हमले से जुड़े आरोपी इतने वर्षों बाद भी पाकिस्तान की गिरफ्त से बाहर कैसे हैं?
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