बेंगलुरु। हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारतीय वायुसेना के लिए 20 स्वदेशी तेजस विमानों (Indigenously built Tejas aircraft) की आपूर्ति का अनुबंध पूरा कर लिया है। शुक्रवार को अंतिम खेप में दो सीट वाले दो तेजस प्रशिक्षण विमान वायुसेना को सौंपे गए। इसके साथ ही एचएएल ने वायुसेना (Air Force) के लिए 70 एचटीटी-40 बेसिक प्रशिक्षण विमानों की आपूर्ति के अनुबंध की शुरुआत भी कर दी है। इस अवसर पर निजी विमानन कंपनी पवनहंस को चार ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर भी सौंपे गए।
बेंगलुरु में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू की मौजूदगी में विमानों और हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी की गई।
अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर 2010 में रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच हुए एफओसी अनुबंध के तहत वायुसेना को 20 तेजस विमानों की आपूर्ति की जानी थी। इनमें 16 एक सीट वाले लड़ाकू विमान और चार दो सीट वाले प्रशिक्षण विमान शामिल थे।
एचएएल पहले ही सभी 16 लड़ाकू विमानों और दो प्रशिक्षण विमानों की आपूर्ति कर चुका था। अंतिम खेप में दो दो-सीट वाले प्रशिक्षण विमान सौंपे जाने के साथ अनुबंध के तहत सभी 20 विमानों की डिलीवरी पूरी हो गई।
एचएएल ने भारतीय वायुसेना के लिए 70 एचटीटी-40 बेसिक प्रशिक्षण विमानों की आपूर्ति के अनुबंध की भी शुरुआत कर दी है। एचटीटी-40 यानी हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40 स्वदेश में डिजाइन और विकसित किया गया प्रशिक्षक विमान है। इसे भारतीय रक्षा सेवाओं की शुरुआती प्रशिक्षण जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
एचएएल के अनुसार, एलसीए एफओसी विमान हल्का, हर मौसम में संचालन करने में सक्षम और कई तरह की भूमिकाएं निभाने वाला 4.5 पीढ़ी का विमान है। इसे मुख्य रूप से भारतीय वायुसेना की प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।
एचएएल के बयान के मुताबिक, इन तकनीकों के विकास से भारत दो सीट वाले लड़ाकू विमान की क्षमता विकसित करने और उसे संचालित करने में सक्षम हुआ है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए देश में विकसित प्रौद्योगिकियां समय की जरूरत हैं। उन्होंने अत्याधुनिक नवाचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए वैज्ञानिकों और अभियंताओं से भविष्य की रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर नई तकनीक विकसित करने का आग्रह किया।
सिंह ने कहा कि देश में ऐसा तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जो असैन्य और सैन्य दोनों क्षेत्रों की विमानन जरूरतों को पूरा कर सके। उन्होंने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को प्रतिद्वंद्वी के बजाय एक-दूसरे का पूरक बताते हुए दोनों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
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